MP और UP समेत इन राज्यों में पाई जाने वाली यह जड़ी-बूटी हार्ट डिजीज के खतरे को कर सकती है कम
नई दिल्ली :- आजकल मिलावटी खाद्य पदार्थों, खराब जीवनशैली और व्यायाम की कमी के कारण ज्यादातर लोग कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं. इनमें सबसे ज्यादा लोगों को दिल से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. दिल की बीमारी बुजुर्गों और युवाओं के साथ-साथ छोटे बच्चों में भी देखी जा रही है. भारत में कई छोटे बच्चे दिल के दौरे के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं.
डॉक्टरों का कहना है कि हृदय रोग, विशेष रूप से साइलेंट हार्ट अटैक, एक साइलेंट किलर हो सकता है क्योंकि इसके लक्षण हल्के या न के बराबर हो सकते हैं, जिससे लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्हें हार्ट अटैक आ रहा है. कई मामलों में, लक्षण बहुत देर तक महसूस नहीं हो सकते हैं या समय के साथ गायब हो सकते हैं, जिसके कारण लोग चिकित्सा सहायता नहीं लेते हैं.
हार्ट अटैक या हार्ट फेलियर कैसे होता है
हार्ट अटैक दिल की धमनियों में ऑक्सीजन और ब्लड फ्लो में ब्लॉकेज या कमी का परिणाम है. हार्ट में ब्लड फ्लो की रुकावट आमतौर पर कोरोनरी धमनियों में फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों के स्टोर होने से होती है, जिससे एथेरोस्क्लेरोसिस होता है. यह जमाव, जिसे प्लाक कहा जाता है, धमनियों को पतला कर देता है, जिससे ब्लड फ्लो सीमित हो जाता है और दिल को जितना मिलना चाहिए उतना ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं मिल पाते हैं.
वहीं, कई बार यह प्लाक फटकर थक्का बना जाता है, जो दिल की ओर जाने वाले ब्लड फ्लो को ब्लॉक कर देता है. इससे हार्ट रेट रुक सकता है या हार्ट फेलियर भी हो सकता है.आज इस खबर के माध्यम से जानिए एक ऐसी जड़ी-बूटी के बारे में जो पूरे भारत के साथ-साथ खासकर मध्य प्रदेश में पाई जाती है, जिसके सेवन से हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा कम हो सकता है.
नागरमोथा क्या है
नागरमोथा जिसका वैज्ञानिक नाम Cyperus scariosus है, यह एक तरह की घास या खरपतवार के रूप में धान की फसलों के साथ उगता है. इसका पौधा छोटा और जड़ें बेहद मजबूत होती है. हजारों सालों से आयुर्वेद में नागरमोथा का इस्तेमाल एक खास जड़ी-बूटी के रूप में किया जाता रहा है. इसके पत्ते, बीज और जड़ सभी में कई हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं. नागरमोथा की जड़ में एक खास गंध होती है और इसका उपयोग कई तरह के घरेलू नुस्खों में किया जाता है. आजकल नागरमोथा की जड़ और उसका चूर्ण बाजार में भी आसानी से मिल जाता है.
कई बीमारियों में फायदेमंद
नागरमोथा का उपयोग भूख बढ़ाने, डाइजेस्टिव डिसऑर्डर को ठीक करने के साथ-साथ कई अन्य बीमारियों में किया जाता है. आयुर्वेद के मुताबिक, नागरमोथा ज्यादा प्यास, बुखार और पेट के कीड़ों की समस्या में फायदेमंद हो सकता है. इसका लेप लगाने से सूजन ठीक हो सकती है. यह दिल की बीमारी होने के खतरे को भी कम करता है. इतना ही नहीं, बच्चे दूध पिलाने वाली महिलाओं के लिए भी यह फायदेमंद होता है.
इसके साथ ही यह भूख में सुधार करके, जन कम करने और एनोरेक्सिक स्थितियों को रोकने में भी मदद करता है. इसके अतिरिक्त, इसका उपयोग अपच, गंभीर दस्त , पेचिश, भूख न लगना, कब्ज, कुपोषण सिंड्रोम और चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS) के प्रबंधन और उपचार के लिए भी किया जाता है.
हार्ट डिजीज में यह कैसे फायदेमंद है
नागरमोथा का सेवन दिल की बीमारी से बचाव करने में मदद करता है क्योंकि नागरमोथा का सेवन कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को खून में कंट्रोल करने में मदद करता है. इससे हार्ट डिजीज के होने की संभावनाएं कम हो जाती है. नागरमोथा का सेवन चूर्ण या काढ़े के रूप में किया जा सकता है.
नागरमोथा कहां पाया जाता है
भारत में यह मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के नदी किनारे के जंगलों में पाया जाता है. इसे मुख्य रूप से अंग्रेजी में नट घास, नट सेज, जावा घास, कोको घास, रेड नटसेज और पर्पल नटसेज, हिंदी में मुस्ताक, नागरमोथा और मोथा कहा जाता है.