चिकनगुनिया और मलेरिया समेत इन वेक्टर जनित बीमारियों के मामलों में उछाल, स्वास्थ्य विभाग ने जारी की चेतावनी
नई दिल्ली :- भारत के कई राज्यों में डेंगू और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है, इसलिए, भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों ने गुरुवार को उभरते खतरे से निपटने के लिए निवारक उपाय करने हेतु चेतावनी जारी की है. डीपीयू सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के आपातकालीन चिकित्सा निदेशक डॉ. तामोरिश कोले ने ईटीवी भारत से कहा कि क्लाइमेट चेंज, मच्छरों के ब्रीडिंग पीरियड को बढ़ाकर और रोग फैलाने वाले रोगाणुओं को नए क्षेत्रों में विस्तारित करने में सक्षम बनाकर, मच्छर जनित बीमारियों के खतरे को बढ़ा रहा है. गर्म तापमान और आर्द्र मौसम मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण बनाते हैं, जिससे उनके ब्रीडिंग और प्रसार में वृद्धि होती है, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.
चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण अक्सर एक जैसे होते हैं
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस समस्या को देखते हुए महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों के स्वास्थ्य विभागों ने जांच और जन जागरूकता अभियान तेज कर दिए हैं, फिर भी रोकथाम के लिए निरंतर वेक्टर-कंट्रोल मेजर, त्वरित और सटीक निदान और मजबूत सामुदायिक भागीदारी की तत्काल आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि शुरुआती फेज में मलेरिया, चिकनगुनिया और डेंगू के लक्षण अक्सर एक जैसे होते हैं. जैसे कि पर तेज बुखार, सिरदर्द, थकान, जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द और कभी-कभी चकत्ते के रूप में. हालांकि, चिकनगुनिया के कारण जोड़ों में गंभीर अकड़न होने की संभावना अधिक होती है, जबकि मलेरिया के कारण ठंड लगना और पसीना आना हो सकता है, और डेंगू के कारण रेट्रो-ऑर्बिटल दर्द और रक्तस्राव की प्रवृत्ति हो सकती है.
इस राज्य में चिकनगुनिया के सबसे अधिक मामले
डॉ. कोले ने कहा कि पुणे समेत भारत के कई इलाकों में प्री-मानसून सीजन की शुरुआत के साथ मलेरिया और चिकनगुनिया के मामले तेजी से बढ़े हैं. के पास मौजूद स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अब तक भारत में चिकनगुनिया के कुल 30876 संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 1741 की पुष्टि हो चुकी है. 592 मामलों के साथ महाराष्ट्र चिकनगुनिया के सबसे ज्यादा मामले दर्ज करने वाले राज्यों में सबसे आगे है, उसके बाद तमिलनाडु (242) और कर्नाटक (238) का नंबर आता है.
National Centre for Vector Borne Disease Control के अनुसार, चिकनगुनिया (जिसे चिकनगुनिया वायरस रोग या चिकनगुनिया बुखार के रूप में भी जाना जाता है) एक दुर्बल करने वाली, लेकिन गैर-घातक, वायरल बीमारी है जो संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलती है. यह डेंगू बुखार जैसा दिखता है. इसी तरह, भारत में डेंगू के कुल 12043 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से छह मौतें केरल में 4 और तमिलनाडु में 2 हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, डेंगू के 5535 मामलों के साथ तमिलनाडु सबसे ज्यादा मामलों वाले राज्यों की लिस्ट में सबसे आगे है, उसके बाद केरल (1417) और महाराष्ट्र (1159) का स्थान है.
भारत मलेरिया की रोकथाम के लिए कर रहा है मजबूत पहल
डेंगू एक तेजी से उभरता हुआ, आउटब्रेक प्रोन और मच्छर जनित वायरल बुखार है. हाल के वर्षों में डेंगू के मामले बढ़ रहे हैं और कई राज्यों और नए क्षेत्रों में बार-बार प्रकोप देखने को मिल रहा है. वर्तमान में, लद्दाख को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डेंगू के मामले सामने आ रहे हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत मलेरिया की रोकथाम के लिए मजबूत पहल कर रहा है.
बीएमसी की रिपोर्ट के अनुसार
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि 2015 से 2023 के बीच मलेरिया के मामलों में 80.5 प्रतिशत की कमी और मौतों में 78.3 प्रतिशत की कमी आई है, और पिछले साल 122 से अधिक जिलों में मलेरिया के कोई मामले नहीं आए हैं, इसलिए देश 2027 तक मलेरिया के मामलों को शून्य करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य उन्मूलन प्रयासों में वैश्विक मानक स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. भारत 2030 तक मलेरिया को खत्म करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है. विश्व मलेरिया रिपोर्ट 2023 के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में अनुमानित मलेरिया मामलों में भारत का योगदान 65.7 प्रतिशत है.
