देश भर में रंगों के त्यौहार होली को लेकर लोगों में काफी उत्साह है। बच्चों से लेकर बड़े लोगों की भीड़ बाजारों देखने को मिल रही है। इस बार कोरोना के दो सालों बाद बिना डर के होली खेलने को देश वासी तैयार है। कशी, मथुरा से लेकर बनारस तक इस त्यौहार की धूम है। एक तरफ जहां वृन्दावन में फूलों और रंगों से होली खेली जाती है तो वहीँ बनारस की अनोखी होली के बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे।

बनारस में रंगों से नहीं बल्कि चिता की राख से होली खेली जाती है। काशी में मान्यता है कि रंगभरी एकादशी के अगले दिन बाबा विश्वनाथ ने यहां महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर अपने गणों के साथ होली खेली थी। जलती चिताओं के बीच डमरू और शंख की आवाजों के बीच अघोरी, तांत्रिक और साधु संत एक दूसरे को वहीं की राख को लगाते हैं।

काशी के महाश्मशान की होली विश्वप्रसिद्ध है। पूरी दुनिया में इस तरह की होली कहीं नहीं खेली जाती है और इसे देखने के लिए पूरी दुनिया से हजारों की संख्या में पर्यटक बनारस पहुंचते हैं। इस दौरान भोलेनाथ के भक्त उनकी ही वेशभूषा में शामिल होते हैं। किसी के गले में सांप लटका मिलेगा तो कोई भस्म को अपने माथे पर रगड़े मिलेगा।
