रायपुर:- छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 को लेकर तैयारियां निर्णायक चरण में पहुंच गई हैं. गृह विभाग की सीधी निगरानी में राज्य सरकार ने इस महाअभियान का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है. रायपुर के सिविल लाइन सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगवा और जनगणना कार्य निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि राज्य में 1 मई से 30 मई 2026 तक मकान सूचीकरण और हाउसिंग सेंसस का पहला चरण चलेगा. पहली बार यह पूरी प्रक्रिया डिजिटल मोड और सेल्फ एन्यूमरेशन के विकल्प के साथ होगी.
गृह विभाग की निगरानी में तेज हुई तैयारियां
गृह विभाग ने जनगणना 2027 को राज्य की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद मानते हुए इसकी कमान अपने हाथ में रखी है. राज्य स्तर से लेकर जिला और तहसील स्तर तक लगातार समीक्षा बैठकें की जा रही हैं. अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगवा स्वयं इस अभियान की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी शहरी या ग्रामीण इलाका सर्वे से छूट न जाए. विभाग का जोर इस बात पर है कि आंकड़े पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद हों, जिससे भविष्य की विकास योजनाओं के लिए मजबूत आधार तैयार हो सके.
1 मई से घर-घर पहुंचेगा प्रशासन
पहले चरण में 1 मई से 30 मई 2026 तक प्रगणक (डेटा इकट्ठा करने वाला कार्यकर्ता) घर-घर जाकर मकानों और परिवारों की जानकारी जुटाएंगे. इस दौरान मकान की स्थिति, निर्माण का प्रकार, पानी-बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं, परिवार की संरचना और उपलब्ध परिसंपत्तियों से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी. गृह विभाग ने इस चरण को राज्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया है, क्योंकि यही डेटा आगे जनसंख्या गणना के दूसरे चरण की नींव बनेगा.
पहली बार डिजिटल जनगणना और सेल्फ एन्यूमरेशन
इस बार जनगणना की सबसे बड़ी खासियत इसका डिजिटल स्वरूप है. नागरिक 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक ऑनलाइन पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी भर सकेंगे. जानकारी दर्ज करने के बाद एक SE ( सेल्फ एन्यूमरेशन) ID जनरेट होगी, जिसे घर आने वाले प्रगणक को दिखाना होगा. प्रगणक की पुष्टि के बाद ही रिकॉर्ड अंतिम रूप से सुरक्षित होगा. गृह विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से डेटा संग्रह की गति बढ़ेगी और त्रुटियों की संभावना कम होगी.
62 हजार से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी मैदान में
राज्य में इस महाअभियान को सफल बनाने के लिए गृह विभाग ने लगभग 62,500 अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है. इसमें प्रमुख जनगणना अधिकारी, जिला स्तरीय अधिकारी, चार्ज अधिकारी, मास्टर ट्रेनर्स, प्रगणक और पर्यवेक्षक शामिल हैं. यह पूरा अमला 33 जिलों, नगरीय निकायों और गांवों तक पहुंचकर सुनिश्चित करेगा कि हर घर की जानकारी समय पर दर्ज हो.
33 जिलों से 19,978 गांव तक माइक्रो प्लानिंग
गृह विभाग ने जनगणना के पहले चरण के लिए राज्यभर में माइक्रो प्लानिंग की है. यह अभियान 33 जिलों, 195 नगरीय निकायों, 252 तहसीलों और 19,978 गांवों में संचालित होगा. इसके लिए लगभग 49 हजार मकान सूचीकरण ब्लॉक बनाए गए हैं. इन ब्लॉकों के जरिए प्रगणकों की जिम्मेदारी तय की गई है, ताकि कोई भी घर या परिवार सर्वे से बाहर न रहे.
गोपनीयता पर गृह विभाग का भरोसा
प्रेस वार्ता में गृह विभाग ने साफ किया कि नागरिकों द्वारा दी गई हर जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत पूरी तरह गोपनीय रहेगी. इन आंकड़ों का उपयोग केवल विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीति निर्माण के लिए किया जाएगा. टैक्स, पुलिस या किसी जांच एजेंसी के साथ इसे साझा नहीं किया जाएगा. इस भरोसे के जरिए सरकार लोगों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश कर रही है.
हेल्पलाइन 1855 से मिलेगी हर जानकारी
जनगणना 2027 से जुड़े सवालों और तकनीकी सहायता के लिए गृह विभाग ने टोल फ्री हेल्पलाइन 1855 शुरू करने की तैयारी की है. 16 अप्रैल से यह सेवा सक्रिय होगी, जहां लोग सेल्फ एन्यूमरेशन, प्रगणक विजिट और अन्य प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारी ले सकेंगे. इसके साथ राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम के जरिए पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग भी की जाएगी.

