नई दिल्ली:- अगर आपने बैंक से लोन लिया है और आप रिकवरी एजेंटों के व्यवहार से परेशान रहते हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है. भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज वसूली की प्रक्रिया को सुधारने और ग्राहकों को उत्पीड़न से बचाने के लिए नए नियमों का एक कच्चा मसौदा पेश किया है.आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के हालिया बयानों के बाद आए इन नियमों का सीधा उद्देश्य वसूली प्रक्रिया में ‘गुंडागर्दी’ को खत्म करना और सभ्यता लाना है.
अब हर कॉल होगी रिकॉर्ड
नए नियमों के तहत, बैंक को यह सुनिश्चित करना होगा कि रिकवरी एजेंट और ग्राहक के बीच होने वाली हर फोन कॉल रिकॉर्ड की जाए. इसका फायदा यह होगा कि अगर कोई एजेंट बदतमीजी करता है या धमकी देता है, तो ग्राहक के पास सबूत होगा और बैंक की जवाबदेही तय की जा सकेगी.
बिना ट्रेनिंग नहीं बन पाएंगे एजेंट
अब कोई भी व्यक्ति राह चलते रिकवरी एजेंट नहीं बन सकेगा. आरबीआई ने प्रस्ताव दिया है कि सभी एजेंटों को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फाइनेंस (IIBF) से विशेष ट्रेनिंग और सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होगा. इससे उन्हें यह पता होगा कि ग्राहकों से बात करने का कानूनी और सही तरीका क्या है.
वक्त और हालात का रखना होगा ख्याल
अक्सर देखा गया है कि एजेंट आधी रात को फोन करते हैं या घर में किसी की मौत होने या शादी होने पर भी पहुंच जाते हैं. आरबीआई ने अब इस पर कड़ा रुख अपनाया है:
एजेंट केवल सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही फोन या विजिट कर सकेंगे.
घर में मृत्यु, बीमारी, शादी या त्योहारों जैसे मौकों पर वसूली के लिए परेशान करना अब नियमों के खिलाफ होगा.
एजेंट को ग्राहक के घर पर “शालीनता और शालीन व्यवहार” बनाए रखना होगा.
धमकी और सोशल मीडिया पर पाबंदी
नए ड्राफ्ट में साफ कहा गया है कि एजेंट न तो अपशब्दों का इस्तेमाल कर सकते हैं और न ही ग्राहकों को डराने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले सकते हैं. साथ ही, बैंकों को अपनी वेबसाइट पर अधिकृत रिकवरी एजेंटों की सूची सार्वजनिक करनी होगी ताकि लोग फर्जी कॉल से बच सकें.

