धमकाकर कर्ज वसूलना पड़ सकता है महंगा, जानिए-कितने साल की हो सकती है जेल
चेन्नई:- तमिलनाडु में जबरन कर्ज वसूली करने वालों के खिलाफ अब सख्त कार्रवाई होगी. राज्यपाल आर.एन. रवि ने उस विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसके तहत दबाव, डर या हिंसा के जरिए कर्ज वसूलने पर पांच साल तक की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. यह कानून आम लोगों को राहत देने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है, खासकर उन लोगों के लिए जो कर्जदार होने के कारण उत्पीड़न झेलते आए हैं.
तमिलनाडु में ऋण देने वाली कुछ संस्थाओं द्वारा ऋण वसूली के लिए धमकियों और दबाव का इस्तेमाल करने की लगातार शिकायतें मिल रही थी. इसके बाद उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने ऋण देने वाली संस्थाओं को व्यक्तियों, स्वयं सहायता समूहों से जबरन धन वसूलने से रोकने के लिए 26 अप्रैल को विधानसभा में एक नया संशोधन विधेयक पेश किया था, जिसे राज्यपाल ने मंजूरी दे दी.
संशोधन विधेयक को पढ़ते हुए उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा था, “उधार देने वाली संस्था को उधारकर्ता या उसके परिवार पर दबाव नहीं डालना चाहिए, धमकी नहीं देनी चाहिए, उनका पीछा नहीं करना चाहिए या उनकी संपत्ति जब्त नहीं करनी चाहिए. उल्लंघन करने वालों को 5 साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. यदि उधार लेने वाला जबरन ऋण वसूलते समय आत्महत्या करता है, तो ऋण देने वाली संस्था को आत्महत्या के लिए उकसाने वाला माना जाएगा.
राज्यपाल ने तमिलनाडु में मेडिकल कचरा फेंकते हुए पाए जाने वालों को बिना किसी मुकदमे के गुंडा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करने संबंधी विधेयक को भी मंजूरी दे दी है. तमिलनाडु में बायोमेडिकल वेस्ट फेंकने पर बिना किसी मुकदमे के सीधे कारावास की सजा देने का विधेयक 24 मार्च को विधानसभा में पेश किया गया था. इस विधेयक को पूर्व कानून मंत्री रघुपति ने पेश किया था. इसके बाद, 29 अप्रैल को इस विधेयक पर चर्चा हुई और इसे पारित कर दिया गया.