किसी भी बीज को अंकुरित होने के लिए मिट्टी की जरूरत होती है. लेकिन हम एक ऐसे बीज के बारे में चर्चा करेंगे जो मिट्टी में नहीं बल्कि दूसरे पेड़ की गोद में ही अंकुरित होता है. इस पेड़ को स्ट्रगलर यानी संघर्षवादी पेड़ भी कहा जाता है.
मिट्टी में नहीं दूसरे पेड़ों की गोद मे होता है अंकुरित.
एक ऐसा बीज जिसे ना तो मिट्टी की जरूरत होती है और ना ही जमीन की. हवा पानी की मदद से दूसरे पेड़ों में ही उसके बीज अंकुरित हो जाते हैं. स्थानीय लोग इसे पाकड़ कहते हैं जिसका साइंटिफिक नाम फिकस वीरेंस है. छिंदवाड़ा जिले के आसपास यह पेड़ पेंच टाइगर रिजर्व में सबसे ज्यादा मात्रा में पाए जाते हैं.
कहलाता है ये स्ट्रगलर ट्री
दूसरे पेड़ों पर अंकुरण होकर इसके बीज भी दरख़्त का रूप ले लेते हैं और फिर धीरे-धीरे जिस पेड़ों के सहारे यह पनपता है उसका गला घोटकर उसे मार डालता है और अपनी जगह तैयार कर लेता है. इस पेड़ को इसलिए स्ट्रगलर ट्री भी कहते हैं.
भगवान विष्णु का रूप माना जाता है पेड़
पाकड़ पेड़ विशाल, सदाबहार वृक्ष है जो पूरे भारत में पाया जाता है. यह वृक्ष अपने घने पत्तों, फैली हुई शाखाओं. और उलझी हुई जड़ों के लिए प्रसिद्ध है. आयुर्वेदिक चिकित्सा में, इस वृक्ष के सभी हिस्सों का उपयोग किया जाता है, जिसमें इसकी छाल, पत्तियाँ, फल, और जड़ें शामिल हैं. पाकड़ वृक्ष को ‘अश्वत्थ’ भी कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु का प्रतीक माना जाता है. इसलिए लोग इसकी पूजा भी करते हैं.