मोर मकान मोर आवास,लेकिन व्यवस्था नहीं झकास, बदहाल हालत पर आंसू बहा रहे गरीब
दुर्ग :- हर इंसान का सपना होता है.एक अपना घर हो. एक ऐसी छत, जहां सुकून हो, सुरक्षा हो और भविष्य के लिए एक मजबूत नींव हो. लेकिन जब वो सपना टूटने लगे तो सिर्फ दीवारें नहीं गिरतीं.उम्मीदें भी टूट जाती हैं.आज ऐसी ही कहानी
हम बात कर रहे हैं भिलाई के जुनवानी क्षेत्र में बने अविनाश मेट्रोपोलिस की, जहां प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनाए गए मकान अब लोगों के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं. सरकार ने यहां कुल 58 आवास बनवाए हैं. लेकिन आज की तारीख में महज 20 परिवार ही यहां रहने को मजबूर हैं. बाकी घरों पर ताले लटके हैं. क्योंकि जो लोग आकर बसे भी, वे अब पछता रहे हैं. इन मकानों को लिए अभी सिर्फ आठ महीने ही हुए हैं. लेकिन दीवारों में सीपेज है, टाइल्स टूट रही हैं, और दीवारों में दरारें साफ दिखाई दे रही हैं.
गरीबों ने लोन लेकर लिया मकान :
कई परिवारों ने बैंक से कर्ज लेकर 3 लाख 60 हजार रुपए चुकाए हैं. पाई-पाई जोड़कर घर खरीदा, लेकिन अब न उनका सपना बचा है.न संतोष. एक महिला शिव कुमारी मानिकपुरी ने भावुक होकर बताया कि हमने खून-पसीना जोड़कर ये घर लिया, सोचा अब अपने बच्चों के साथ चैन की जिंदगी जीएंगे. लेकिन हर तरफ से पानी टपक रहा है.रातभर नींद नहीं आती.ऐसा लगता है जैसे इस घर के साथ हमारा सपना भी बह रहा है.
ना सड़क है, ना पानी की व्यवस्था.ऊपर के फ्लोर तक पानी नहीं पहुंचता. बाल्टी लेकर नीचे से ऊपर लाना पड़ता है. क्या ये सपना था या सजा? लोगों ने बार-बार नगर निगम के चक्कर लगाए, शिकायत की, गुहार लगाई. लेकिन कोई अधिकारी झांकने तक नहीं आया. उम्मीद थी कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बना ये घर एक नई शुरुआत देगा. लेकिन अब ये मकान आंसुओं की दीवार बन गया है -प्रीति यादव, पीड़ित महिला
इस पूरे मामले पर भिलाई नगर निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने समाधान का भरोसा दिलाया है.
आप लोगों के माध्यम से यह समस्या संज्ञान में आई है. मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जल्द से जल्द मौके पर जाकर निरीक्षण करें और समाधान करें- राजीव पांडेय,आयुक्त भिलाई नगर निगम
प्रधानमंत्री आवास योजना का मकसद था हर गरीब को छत देना. जुनवानी के इन मकानों में छत है, दीवारें हैं लेकिन इनके नीचे रहने वाली जिंदगियों को जिंदा रहने का भरोसा नहीं. सरकार और जिम्मेदार अधिकारियों से निवेदन है कि गरीबों के बिखरते सपने को बचा ले,क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ तो गरीबों का सरकार पर से भरोसा भी टूट जाएगा.