नई दिल्ली/जयपुर/रायपुर : कांग्रेस शासित राज्य जयपुर और छत्तीसगढ़ के 2023 के आखिर विधानसभा चुनाव होने हैं। दोनों राज्यों में सीएम पद के लिए शुरु हुआ विवाद अभी तक ठंडा नहीं पड़ा है। इसे लेकर कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व संगठन स्तर बड़े बदलाव करने की तैयारी में है। बता दें कि राजस्थान में पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट लगातार कांग्रेस आलाकमान के आगे अपनी दावेदारी मजबूत करते रहे हैं। एक दिन पहले मंगलवार को पायलट अपनी ही सरकार को घेरने अनशन पर बैठ गए थे। जिसके बाद बुधवार को सचिन पायलट को दिल्ली तलब किया गया।
सूत्र बताते हैं कि पंजाब से सबक लेकर वहां वाली चूक कांग्रेस राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नहीं दोहराना चाहती। लिहाजा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इशारा दिया है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच खींचतान को खत्म करने और पार्टी में एकता बहाल करने के लिए एक बड़ा बदलाव किया जा सकता है। हालांकि 10 जनपथ की ओर से साफ कर दिया गया है कि राज्य में होने वाले विधानसभा सीएम आशोक गहलोत के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
छत्तीसगढ़ में भी दिखेगा असर, टीएस सिंहदेव की सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद कयास शुरु
राजस्थान के साथ छत्तीसगढ़ का सियासी पारा भी इन दिनों चढ़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस कद्दावर नेता एवं प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव हाल ही में कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी से मुलाकात कर चुके हैं। हालांकि इसे उन्होंने औपचारिक भेंट बताया मगर अंदर खाने में इस बात की चर्चा है कि पार्टी में उनके कद को कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व गंभीर है।

दिल्ली से लौटने के बाद सिंहदेव ने पूरे आत्मविश्वास से दावा किया है छत्तीसगढ़ कांग्रेस में वे एक्ट्रा प्लेयर नहीं हैं। इसका मतलब साफ है कि सोनिया गांधी से उनकी मुलाकात में प्रदेश में सीएम पद की दावेदारी पर भी बात हुई है। बता दें जब राजस्थान में सचिन पायलट अपनी सरकार के खिलाफ अनशन पर थे तब टीएस सिंहदेव ने यह कर सनसनी फैला दी कि सचिन पायलट ने कोई लक्ष्मण रेखा पार की ऐसा मुझे नहीं लगता है। यह पार्टी विरोधी गतिविधि नहीं है।
सिंहदेव ने कहा, सचिन पायलट को लगता होगा कि चुनाव के समय उन्हें मतदाता को जवाब देना पड़ेगा, क्योंकि उन्होंने कहा था कि वसुंधरा राजे की सरकार में बहुत भ्रष्टाचार हुआ है और वे इसकी जांच कराएंगे लेकिन उन्होंने नहीं कराई। अब आप जनता के पास जाएंगे तो जनता आपसे जवाब मांगेगी। कहेगी हम आपको वोट क्यों दें, आपने जो कहा था अपनी बात पूरी नहीं की।
बता दें कि छत्तीसगढ़ में भी स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव खुद को सीएम पद का दावेदार बताते रहें हैं साथ ही कांग्रेस जन घोषणा में जनता से किए गए वादों को लेकर अपनी ही सरकार पर कई सवाल उठा चुके हैं। मगर उन्होंने पार्टी हाईकमान या सीएम भूपेश बघेल को लेकर सीधे बयानबाजी नहीं की। अपनी बात पार्टी फोरम में ही रखते रहे।
ये भी बता दें कि दोनों राज्यों में इसी साल चुनाव होने हैं। ऐसे हालात में पंजाब से सबक लेकर कांग्रेस, पार्टी के किसी बड़े चेहरे की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। लिहाजा छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीएम पद के दावेदारों के बीच सुलह के प्रयास शुरू हो गए हैं। जल्द ही इसका असर भी सामने आ सकता है।

