अपना घर खरीदना हर भारतीय परिवार का सबसे बड़ा सपना होता है. इस सपने को पूरा करने के लिए लोग अपनी जमा-पूंजी लगा देते हैं और बाकी की रकम ‘होम लोन’ के जरिए जुटाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर लोन चुकाने वाले व्यक्ति के साथ कोई अनहोनी हो जाए, तो उस घर का और उसके परिवार का क्या होगा? यहीं पर ‘होम लोन इंश्योरेंस’ की भूमिका शुरू होती है.
अनहोनी में ढाल बनता है यह बीमा
होम लोन इंश्योरेंस का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यदि पॉलिसी अवधि के दौरान कर्जदार की मृत्यु हो जाती है, तो बीमा कंपनी बैंक का पूरा बकाया लोन चुकाती है. इसका सीधा मतलब यह है कि संकट की घड़ी में परिवार के सिर से छत छिनने का खतरा टल जाता है. बैंक अक्सर लोन रिकवरी के लिए संपत्ति की नीलामी करते हैं, लेकिन इंश्योरेंस होने पर घर परिवार के पास ही सुरक्षित रहता है.
नौकरी और बीमारी का कवर
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्वास्थ्य और रोजगार की अनिश्चितता बढ़ गई है. कई आधुनिक होम लोन इंश्योरेंस प्लान अब गंभीर बीमारी और स्थायी विकलांगता को भी कवर करते हैं. इतना ही नहीं, कुछ पॉलिसियों में नौकरी जाने की स्थिति में भी 3 से 6 महीने की EMI का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है, जिससे कर्जदार को नया रोजगार तलाशने का समय मिल जाता है.
अक्सर बैंक लोन देते समय ग्राहकों पर इंश्योरेंस खरीदने का दबाव बनाते हैं. हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक और IRDAI के नियमों के अनुसार, होम लोन इंश्योरेंस लेना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है. यह पूरी तरह से ग्राहक की इच्छा पर निर्भर करता है. हाल ही में आरबीआई ने बैंकों को सख्त चेतावनी दी है कि वे ग्राहकों को बीमा खरीदने के लिए मजबूर न करें. ग्राहक अपनी पसंद की किसी भी कंपनी से बीमा ले सकता है या अपनी मौजूदा जीवन बीमा पॉलिसी का उपयोग भी कर सकता है.
टैक्स लाभ और भुगतान की सुविधा
इस बीमा का प्रीमियम आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के दायरे में आता है. सबसे बड़ी सुविधा यह है कि ग्राहक को प्रीमियम की मोटी रकम अलग से देने की जरूरत नहीं होती; बैंक इसे मुख्य लोन राशि में जोड़ देते हैं, जिससे यह EMI का एक छोटा हिस्सा बन जाता है.

