डिजिटल इंडिया के दौर में ठगों ने आम जनता को लूटने का एक नया और बेहद शातिर तरीका निकाल लिया है। अब अपराधी आपके फोन का पासवर्ड या पिन नहीं मांगते, बल्कि आपकी मदद करने की भावना का फायदा उठाते हैं। शहर के व्यस्त इलाकों जैसे कनॉट प्लेस, मेट्रो स्टेशनों और बस अड्डों के पास ऐसे मामले सामने आए हैं जहां मदद के नाम पर फोन मांगने वाले जालसाजों ने चंद सेकंड में बैंक खाते साफ कर दिए।
मदद की आड़ में ‘OTP’ का खेल: ऐसे होती है ठगी
इस स्कैम की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली है। अपराधी अक्सर सार्वजनिक स्थानों पर आपको रोककर मजबूरी का बहाना बनाता है—जैसे उसका फोन बंद हो गया है या उसे घर पर कोई जरूरी सूचना देनी है। जैसे ही आप उसे अपना फोन देते हैं, वह अपने साथी को कॉल करता है। दूसरी तरफ बैठा साथी कॉल रिसीव करने से पहले ही आपके नंबर को अपने सिस्टम में सेव कर चुका होता है और तुरंत आपके बैंक अकाउंट में लॉगिन की रिक्वेस्ट भेज देता है।
इस दौरान आपके फोन पर एक OTP आता है। फोन पर बात कर रहा व्यक्ति बड़ी चालाकी से उस OTP को जोर से बोल देता है, जैसे वह सामने वाले को कोई गाड़ी का नंबर या पता बता रहा हो। असल में वह कोड उसके साथी के पास पहुँच जाता है, जो दूसरी तरफ से आपका खाता एक्सेस कर रहा होता है। जब तक आप अपना फोन वापस लेते हैं, तब तक आपके खाते से पैसे उड़ चुके होते हैं।
ठगी से बचने के लिए क्या करें?
साइबर विशेषज्ञों ने इस बढ़ते खतरे को देखते हुए कुछ कड़े सुरक्षा उपाय साझा किए हैं, जो हर मोबाइल यूजर को अपनाने चाहिए:
बायोमेट्रिक लॉक: अपने सभी बैंकिंग ऐप्स पर फिंगरप्रिंट या फेस लॉक लगाकर रखें।
2FA (Two-Factor Authentication): केवल पासवर्ड पर निर्भर न रहें, सुरक्षा की दूसरी परत हमेशा चालू रखें।
अनजान रिक्वेस्ट पर नजर: अगर बिना किसी लेन-देन के अचानक फोन पर OTP आए, तो समझ जाएं कि आपका डेटा खतरे में है।
वैकल्पिक मदद: यदि कोई वाकई संकट में है, तो उसे पास के पुलिस बूथ, पीसीआर वैन या किसी बड़ी दुकान के लैंडलाइन से फोन करने की सलाह दें।

