नई दिल्ली:- प्रोविडेंट फंड एक रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान करते हैं. इसका संचालन कर्मचारी भविष्य निधि संगठन द्वारा किया जाता है. यह योजना वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भविष्य में फाइनेंशियल सिक्योरिटी सुनिश्चित करने और पेंशन लाभ प्रदान करने के लिए बनाई गई है. पीएफ खाते पर ब्याज मिलता है.
आमतौर पर कर्मचारी यह पैसा रिटायरमेंट के बाद आने वाली चुनौतियों के मद्देनजर जमा करते हैं. ऐसे में अगर किसी कर्मचारी की मौत हो जाए तो उसके पीएफ अकाउंट में जमा पैसा उसके नॉमिनी को दे दिया जाता है. ऐसे में अगर कर्मचारी शादीशुदा है और उसने अपनी पत्नी को नॉमिनी बनाया है तो यह पैसा उसे मिल जाता है.
पति-पत्नी का तलाक हो जाए तो पैसा किसे मिलेगा
ऐसे में सवाल उठता है कि अगर किसी शख्स ने अपनी पत्नी को नॉमिनी चुना है और उसका तलाक हो जाए और उसका कोई बच्चा न हो तो उसकी मृत्यु हो जाए तो ऐसी स्थिति में पीएफ अकाउंट में जमा उसका पैसा उसके आश्रित माता-पिता को दिया जाएगा.
शादी के बाद किसे नॉमिनी बना सकते हैं कर्माचारी
EPF-EPS के हिसाब से परुष सदस्य के लिए पत्नी, बच्चे (शादीशुदा हों या न हों), आश्रित माता-पिता, मृतक बेटे की पत्नी और बच्चे को फैमिली माना जाता है. वहीं, महिला कर्मचारी के लिए पति, बच्चे, आश्रित माता-पिता, सास-ससुर, मृतक बेटे की पत्नी और बच्चे को परिवार माना जाता है. ऐसे में पीएफ की राशि के लिए केवल इन्हीं लोगों को नॉमिनी बनाया जा सकता है.
क्या शादी से पहले चुना गया ‘नॉन-फैमिली’ नॉमिनी वैध रहता है
शादी के बाद नॉन-फैमिली व्यक्ति का नॉमिनेशन अपने-आप कैंसिल हो जाता है. ऐसे में अगर किसी शख्स ने अपने किसी रिश्तेदार को नामित किया था, तो शादी के बाद उसका हक ऑटौमैटिकली खत्म हो जाएगा और अगर किसी कर्मचारी ने आपने शादी के बाद नया नॉमिनी नहीं चुना, तो फंड का पैसा उस व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगा, जिसे वह इसका लाभ देना चाहता है.

