भारत में लगभग 28 फीसदी मौतें कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों से होती हैं, जिससे यह एक बड़ी हेल्थ चुनौती बन जाती है. दिल की कई बीमारियां, खासकर हार्ट वाल्व की बीमारियां, शुरुआती स्टेज में लक्षण नहीं दिखातीं, इसलिए जल्दी पता लगाना और लाइफस्टाइल में बदलाव करना बहुत जरूरी है.
क्या है हार्ट वाल्व डिजीज
बहुत से लोग हार्ट वाल्व डिजीज को हार्ट अटैक समझ लेते हैं. लेकिन, बीएम बिड़ला हार्ट हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी निदेशक डॉ. अंजन सियोतिया ने ईटीवी भारत को बताया कि दोनों अलग-अलग हैं. हार्ट में चार वाल्व होते हैं. ये चार हार्ट वाल्व खून को सही दिशा में बहने में मदद करते हैं. लेकिन, जब हृदय के एक या अधिक वाल्व (एओर्टिक, माइट्रल, पल्मोनरी, या ट्राइकस्पिड) ठीक से नहीं खुलते या बंद होते हैं, तो उसे हार्ट वाल्व डिजीज कहते हैं.
हार्ट वाल्व डिजीज की वजह से शरीर के हर पार्ट्स में ब्लड का फ्लो खराब हो जाता है. यह स्थिति शरीर के लिए नुकसानदायक होती है. ऐसी समस्याओं से बचने के लिए, हार्ट वाल्व से जुड़ी सभी समस्याओं को समझना जरूरी है. इस खबर में डॉ. हार्ट वाल्व की बीमारी के शुरुआती लक्षणों और इलाज के तरीकों के बारे में विस्तार जानकारी शेयर किए हैं, जो इस प्रकार है…
हार्ट वाल्व डिजीज के शुरुआती लक्षण
हार्ट वाल्व डिजीज का अक्सर लंबे समय तक पता नहीं चलता, हालांकि, इसके शुरुआती लक्षण इस प्रकार हो सकते हैं…
थकान: थकान किसी भी हार्ट डिजीज का सबसे आम लक्षण है. इसी तरह, हार्ट वाल्व डिजीज के मरीज थोड़ी सी भी फिजिकल एक्टिविटी में थका हुआ महसूस कर सकते हैं. कभी-कभी, उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत हो सकती है. छोटे-मोटे काम भी थकान और कमजोरी का कारण बन सकते हैं.
पैरों या टखनों में सूजन: इन बीमारियों में पैरों या टखनों में सूजन भी देखी जा सकती है. कई लोग शुरुआती स्टेज में इस सूजन को नजरअंदाज कर देते हैं. एक्सपर्ट्स पैरों में सूजन दिखते ही अलर्ट होने की सलाह देते हैं.
सीने में दर्द: हार्ट वाल्व डिजीज के मरीजों को लगातार सीने में दर्द हो सकता है. इसके अलावा, दिल की धड़कन भी तेज हो सकती है.
चक्कर आना: चक्कर आना भी शुरुआती लक्षणों में से एक है. अगर आपको कमजोरी के साथ चक्कर आने लगें तो डॉक्टर सावधान रहने की सलाह देते हैं.
इर्रेगुलर हार्ट रेट: डॉक्टर्स सलाह देते हैं कि अगर आपको तेज चलते या सीढ़ियां चढ़ते समय इर्रेगुलर हार्ट रेट महसूस हो तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए.
हार्ट वाल्व डिजीज के कारण
उम्र बढ़ने के साथ हार्ट वाल्व संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि, यदि खान-पान की आदतें अच्छी न हों, तो छोटी उम्र में भी इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है.
यदि परिवार में किसी को हार्ट डिजीज है, तो इस बीमारी के होने का खतरा बढ़ जाता है.
अनहेल्दी डाइट, स्मोकिंग, मोटापा आदि जैसी बुरी आदतें हार्ट वाल्व डिजीज के खतरे को बढ़ाती हैं.
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों से भी यह खतरा बढ़ जाता है.

