नई दिल्ली: भारत के बायोटेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को मजबूती देने के लिए केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुक्रवार को सरकार की 1 लाख करोड़ रुपये की अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) पहल के तहत ‘BIRAC-RDI फंड’ की पहली नेशनल कॉल की घोषणा की. इस कदम को विज्ञान-आधारित विकास को गति देने और भारत को उभरती प्रौद्योगिकियों में वैश्विक नेता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल भारत के नवाचार के प्रति नजरिए में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाती है, जिसे उन्होंने “नीतिगत हिचकिचाहट” से “नीतिगत तेजी” के रूप में वर्णित किया. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब उन्नत तकनीकों में पीछे रहने वाला देश नहीं है, बल्कि एक ऐसे ‘अर्ली मूवर’ (शुरुआत करने वाले) के रूप में उभर रहा है जिसमें वैश्विक रुझानों को आकार देने की क्षमता है.
पिछले दशक में भारत के बायोटेक्नोलॉजी परिदृश्य में जबरदस्त बदलाव आया है. बायोटेक उद्यमियों की संख्या साल 2014 के लगभग 50 से नाटकीय रूप से बढ़कर आज 11,000 से अधिक हो गई है, जो विकास की तीव्र गति और बड़े इरादों को दर्शाता है. इसके अलावा, भारत की बायो-इकोनॉमी (जैव-अर्थव्यवस्था) में भी महत्वपूर्ण वृद्धि हुई है. 2014 के करीब 8 अरब डॉलर से बढ़कर यह 2024 में लगभग 165 अरब डॉलर तक पहुंच गई है. अनुमान है कि 2030 तक यह बायो-इकोनॉमी लगभग 300 अरब डॉलर के स्तर को छू लेगी.
केंद्रीय मंत्री ने कहा, “बायोटेक्नोलॉजी औद्योगिक विकास के अगले चरण को उसी तरह रफ्तार देगी, जैसे अतीत में सूचना प्रौद्योगिकी (IT) ने दी थी.” उन्होंने आगे कहा कि आने वाली औद्योगिक क्रांति ‘बायो-इनोवेशन’, उन्नत विनिर्माण और नए जमाने की उद्यमिता से प्रेरित होगी.
BIRAC-RDI फंड का एक मुख्य उद्देश्य प्रयोगशाला के शोध और औद्योगिक स्तर के उत्पादन के बीच के पुराने अंतर को खत्म करना है. यह फंड इक्विटी, कन्वर्टिबल डेब्ट (परिवर्तनीय ऋण) और लंबी अवधि के लोन के माध्यम से ‘टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल’ (TRL) 4 से 9 तक की तकनीकों को सहायता प्रदान करेगा. इससे स्टार्टअप्स और अनुसंधान संस्थानों को अपने आइडिया को बाजार में बिकने वाले उत्पादों में बदलने में मदद मिलने की उम्मीद है.
डॉ. राजेश गोखले ने बताया कि इस फंड को उच्च-जोखिम वाले और लंबे समय तक चलने वाले शोध कार्यों के लिए बनाया गया है, जिन्हें निरंतर निवेश और बुनियादी ढांचे की जरूरत होती है. उन्होंने कहा कि यह ‘BioE3’ जैसी मौजूदा नीतियों का समर्थन करता है और इसका लक्ष्य बायोफार्मा, बायो-इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, बायो-एनर्जी, ब्लू इकोनॉमी (समुद्री अर्थव्यवस्था) और बायो-कंप्यूटेशन जैसे क्षेत्रों में नवाचार को तेज करना है.
इस बीच, डॉ. जितेंद्र कुमार ने आरडीआई (RDI) ढांचे के तहत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) की भूमिका पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बीआईआरएसी (BIRAC) अगले पांच वर्षों में 2,000 करोड़ रुपये खर्च करेगा, जिसे मांग और परिणामों के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है.
पिछले एक दशक में, बीआईआरएसी ने एक मजबूत नवाचार ईकोसिस्टम तैयार किया है, जिसके तहत 100 से अधिक बायो-इंक्यूबेशन सेंटर (स्टार्टअप केंद्रों) की स्थापना की गई है और 10 लाख वर्ग फुट से अधिक की जगह स्टार्टअप्स के लिए तैयार की गई है. संस्था ने देश भर के 15 लाख से अधिक स्टार्टअप उद्यमियों के साथ संपर्क साधा है, जो भारत के बायोटेक ईकोसिस्टम की बढ़ती गहराई को दर्शाता है.
बीरैक-आरडीआई (BIRAC-RDI) फंड उस व्यापक राष्ट्रीय आरडीआई पहल का हिस्सा है, जिसे जुलाई 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी और नवंबर 2025 में अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया था. अधिकारियों ने कहा कि यह पहल भारत को केवल शोध तक सीमित न रहकर उसे बड़े औद्योगिक परिणामों में बदलने में मदद करेगी, जिससे वैश्विक बायो-इकोनॉमी में भारत की स्थिति और मजबूत होगी.
उभरते हुए नए क्षेत्रों पर जोर देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘स्पेस बायोटेक्नोलॉजी’ और ‘स्पेस मेडिसिन’ जैसे भविष्य के क्षेत्रों में भारत के प्रवेश की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि स्वदेशी किट का उपयोग करके अंतरिक्ष में पहले से ही बायोटेक्नोलॉजी के प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनमें वनस्पति विज्ञान और जीव विज्ञान से जुड़े शोध शामिल हैं. उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से भारत की वैज्ञानिक क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक ज्ञान प्रणालियों में भी योगदान मिलेगा.
मंत्री ने नवाचार को बढ़ावा देने के लिए बनाए जा रहे व्यापक इकोसिस्टम पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि हालिया नीतिगत बदलावों के कारण अब उन स्टार्टअप्स को भी फंडिंग के लिए आवेदन करने की अनुमति है जिनका काम अभी बिल्कुल शुरुआती चरण में है. यह बदलाव दिखाता है कि सरकार अब जोखिम लेने और अधिक से अधिक स्टार्टअप्स को साथ लेकर चलने की दिशा में बढ़ रही है.
इस पहल को एक ऐतिहासिक क्षण बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि यह लॉन्च एक स्पष्ट संकेत है कि भारत वैज्ञानिक प्रतिभा, उद्यमशीलता की ऊर्जा और मजबूत नीतिगत समर्थन के दम पर बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व करने के लिए तैयार है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “संदेश बिल्कुल साफ है, अब हम पीछे रहने वालों में से नहीं हैं. भारत वैश्विक नवाचार के परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है.”
इस पहल के लिए आवेदनों की राष्ट्रीय शुरुआत हो चुकी है. स्टार्टअप्स, लघु एवं मध्यम उद्योगों (SMEs) और औद्योगिक भागीदारों को आधिकारिक BIRAC RDI पोर्टल के माध्यम से अपने प्रस्ताव जमा करने के लिए आमंत्रित किया गया है. पहले चरण के आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 31 मार्च, 2026 है.

