नई दिल्ली :- ट्रेनों से मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए रेलवे सुरक्षा बल ने अपने प्रयास तेज कर दिये हैं. रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, आरपीएफ ने वर्ष 2025 के मई तक लगभग 82 करोड़ रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए. वहीं, वर्ष 2024 में 220 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के नशीले पदार्थ जब्त किए थे. इस दौरान कुल 1,388 तस्करों को गिरफ्तार किया गया था.
पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी कपिंजल किशोर शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया, “आरपीएफ रेलवे नेटवर्क के माध्यम से नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के बढ़ते खतरे से लड़ने के प्रयासों को दोहराता है. सुरक्षा बल नशीली दवाओं की तस्करी के लिए रेलवे प्रणाली के दुरुपयोग को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
बेंगलुरू में जागरुकता अभियानः आरपीएफ बेंगलुरू ने जीआरपी के साथ मिलकर जागरुकता अभियान चलाया. इस दौरान अधिकारियों ने यात्रियों को नशीली दवाओं के हानिकारक प्रभावों के बारे में बताया गया. आरपीएफ के आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मई तक 914 मामले दर्ज किए गए. 691 गिरफ्तारियां हुईं तथा लगभग 81.78 करोड़ रुपये मूल्य की वस्तुएं जब्त की गईं.
सियालदह में ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ः पिछले सप्ताह सियालदह में नियमित जांच के दौरान एक बड़े ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए, आरपीएफ ने 3.35 करोड़ रुपये मूल्य के 6 किलोग्राम से अधिक मादक पदार्थों के साथ एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया था. इसी तरह, आरपीएफ और जीआरपी गुडूर की एक संयुक्त टीम ने गुडूर स्टेशन पर 45 हजार रुपये मूल्य के 3 किलोग्राम सूखे गांजे की तस्करी करते हुए एक ड्रग तस्कर को गिरफ्तार किया था.
“संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (यूएनओडीसी) के अनुसार, 2021 में लगभग 296 मिलियन लोगों ने ड्रग्स का इस्तेमाल किया, जो पिछले एक दशक में 23 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. तस्कर अक्सर अनारक्षित डिब्बों, स्लीपर कोच, पार्सल वैन और यहां तक कि यात्रियों को मानव वाहक के रूप में इस्तेमाल करते हैं. यह प्रवर्तन एजेंसियों के लिए एक अनूठी चुनौती है. हालांकि, आरपीएफ सतर्क और सक्रिय है.”- कपिंजल किशोर शर्मा, सीपीआरओ
खोजी कुत्ता और गुप्तचर तैनातः रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ट्रेनों, प्लेटफॉर्म और पार्सल कार्यालयों पर नियमित और औचक निरीक्षण किया जाता है. उच्च जोखिम वाले स्थानों पर विशेष निगरानी दल, खोजी कुत्तों के दस्ते और गुप्तचर अधिकारी तैनात किए जाते हैं. आरपीएफ संयुक्त अभियान और खुफिया जानकारी साझा करने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), जीआरपी, राज्य पुलिस और अन्य प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है.
संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने की अपीलः इसके अलावा, सीसीटीवी निगरानी, हैंडहेल्ड स्कैनर और बॉडी-वॉर्न कैमरे जैसे आधुनिक उपकरणों का प्रभावी निगरानी के लिए बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. आरपीएफ ने लोगों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देने का आग्रह किया है. इस बात पर जोर देते हुए कि मादक पदार्थों की तस्करी न केवल एक कानूनी मुद्दा है, बल्कि सामाजिक कल्याण के लिए एक गंभीर खतरा है.