बीजापुर :- जिला मुख्यालय के दारापारा इलाके में एक पुलिसकर्मी के घर में नाबालिग आदिवासी छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है. मृतका की पहचान 14 वर्षीय चांदनी कुडियम के तौर पर हुई है, जो भैरमगढ़ की रहने वाली थी. चांदनी छठवीं कक्षा की छात्रा थी. परिजनों ने आरोप लगाया है कि चांदनी की हत्या की गई है और मामले को आत्महत्या का रूप देकर दबाने की कोशिश की गई.
कब हुई थी घटना : घटना 17-18 अक्टूबर की बताई जा रही है. पुलिसकर्मी सुभाष तिर्की के दारापारा स्थित मकान से चांदनी कुडियम का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला था. परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मी और उसकी पत्नी नीरजा तिर्की ने शव को गोपनीय तरीके से बोलेरो वाहन में रखकर चांदनी के गृहग्राम दुगोली पहुंचाया, जहां परिजनों को डेढ़ लाख रुपये देकर मामले को रफा-दफा करने की पेशकश की गई.
घर का काम कराने ले गया था पुलिसकर्मी : मृतका के भाई अजय कुडियम ने बताया कि जून महीने में पुलिसकर्मी की पत्नी नीरजा तिर्की अपने रिश्तेदार के साथ उनके घर आई थी और काम और पढ़ाई कराने के बहाने चांदनी को अपने साथ ले गई थी. जब भाई ने विरोध किया तो नीरजा ने कहा कि वह उसकी देखभाल और शिक्षा की पूरी जिम्मेदारी लेगी, लेकिन कुछ ही महीनों में हालात बदल गए.
क्यों लग रहा है मामला संदिग्ध : घटना से एक दिन पहले चांदनी ने अपने भाई अजय को फोन कर बताया था कि वह बहुत परेशान है और घर लौटना चाहती है.उसने ये भी कहा था कि पुलिसकर्मी के घर के पीछे एक गड्ढा खोदकर कुछ छिपाया गया है और उसके पास कई राज हैं जो वह घर आकर बताएगी. लेकिन अगली सुबह उसकी मौत की खबर आई.अजय ने बताया कि मौत के बाद सुभाष तिर्की और उसकी पत्नी नीरजा गांव पहुंचे और कहा कि मामले को पुलिस तक न जाने दिया जाए. उन्होंने डेढ़ लाख रुपये देकर समझौता करने का प्रस्ताव रखा.लेकिन गांव की एक युवती ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी.
शव को जलाने का बनाया था दबाव : इससे पहले की पुलिस मौके पर पहुंचती, सुभाष तिर्की और नीरजा शव को लेकर गांव पहुंच गए और जबरन अंतिम संस्कार कराने का दबाव बनाया.सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर बीजापुर अस्पताल भेजा गया. वहां पोस्टमार्टम कराया गया और मामला दर्ज कर लिया गया. मृतका के परिवार ने साफ कहा है कि उनकी बेटी आत्महत्या नहीं कर सकती थी, क्योंकि वह खुशमिजाज और पढ़ाई में रुचि रखने वाली थी. उनका आरोप है कि घर में उसके साथ मारपीट और उत्पीड़न होता था.

