रायपुर:- राज्य में अप्रैल में होने वाले राज्यसभा की दो सीटों के चुनाव के लिए सियासी बिसात बिछ चुकी है। केटीएस तुलसी और फूलोदेवी नेताम का कार्यकाल समाप्त होने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस के हिस्से में एक-एक सीट जाना तय माना जा रहा है।
कांग्रेस में अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा ने बाहरी बनाम स्थानीय के पुराने विवाद को फिर हवा दे दी है। केटीएस तुलसी के बाद एक और बाहरी चेहरे पर कार्यकर्ताओं के तेवर कड़े बताए जा रहे हैं। वहीं भाजपा में विधानसभा चुनाव हार चुके नेता राज्यसभा के जरिए वापसी की कोशिश में हैं। दिल्ली नेतृत्व स्थानीय निष्ठा को प्राथमिकता देगा या रणनीतिक चेहरों को, इस पर सबकी नजर है।
कांग्रेस में सिंघवी के नाम की चर्चा
कांग्रेस खेमे में वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी के नाम की चर्चा से प्रदेश इकाई में असहजता देखी जा रही है। चर्चा है कि तेलंगाना में बाहरी उम्मीदवार के रूप में विरोध झेल रहे सिंघवी के लिए छत्तीसगढ़ को विकल्प बनाया जा सकता है।
सिंघवी के पक्ष में केंद्रीय नेतृत्व की पैरवी और प्रदेश के शीर्ष नेताओं के कानूनी मामलों में उनकी भूमिका को अहम माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय बनाम बाहरी का मुद्दा पार्टी के भीतर मतभेद पैदा कर रहा है। एक धड़ा केटीएस तुलसी के बाद फिर किसी बाहरी को मौका देने के विरोध में है। बताया जा रहा है कि स्थानीय नेता अपनी बात रखने के लिए दिल्ली में हाईकमान से मुलाकात कर सकते हैं।
भाजपा में वापसी की कोशिश
सत्ताधारी भाजपा में विधानसभा चुनाव हार चुके कई नेता राज्यसभा के जरिए सक्रिय राजनीति में लौटने की कोशिश में हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बार संगठन से जुड़े किसी स्थानीय चेहरे को मौका दिया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय व्यापक राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

