रायपुर : शिक्षक भर्ती से जुड़ी हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर है। एसटी को 65 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के मामले में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने निर्णय से बाधित रखा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार ने जवाब तलब किया है। सरगुजा और बस्तर में शिक्षक भर्ती पक्रिया में आरक्षण नियम 1994 के विपरीत 20 प्रतिशत के स्थान पर अनुसूचित जनजाति को 65 प्रतिशत से अधिक आरक्षण देने पर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
शिक्षक व सहायक शिक्षक की भर्ती प्रक्रिया को इस याचिका के निर्णय के अधीन रखा है। इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर वाले सप्ताह में होगी। इस मामले में याचिकाकर्ता कामेश्वर कुमार यादव, योगेंद्र मनी वर्मा व अन्य ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता अजय कुमार श्रीवास्तव के जरिये याचिका दायर की। अधिवक्ता अजय कुमार श्रीवास्तव ने कहा गया कि राज्य सरकार की तरफ से शिक्षक टी संवर्ग में 4659 पद एवं ई संपर्ग में 1113 पदों की भर्ती के लिए 4 मई 2023 को विज्ञापन जारी किया गया है।
इस विक्षापन में सहायक शिक्षक पद के लिए आवेदन आमंत्रित किया गया है। छत्तीसगढ़ लोक सेवा ( अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्गों के लिए आरक्षण) नियम 1994 के तहत तृतीय एवं चतुर्थ वर्ग पदों केलिए अनुसूचित जाती को 15 आरक्षण दिया जाना है, लेकिन अनुसूचित जनजाति को 65 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। याचिकाकर्ता के वकील अजय कुमार श्रीवास्तव ने दलील दी कि राज्य सरकार द्वारा 2011 में 50 से 58 प्रतिशत आरक्षण को बढ़ाने की अधिसूचना को भी हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था।
सर्वोच्च न्यायालय ने सिर्फ लंबित विज्ञापनों को 58 प्रतिशत आरक्षण के आधार पर क्रियान्वित करने का आदेश दिया है। इस कारण नये विज्ञापन में पद पूर्व नियम से ही आरक्षित किये जायेंगे। लिहाजा अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत अनुसूचत जनजाति को 20 प्रतिशत एवं ओबीसी को 14 प्रतिशत कुल 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है। लेकिन, शिक्षक भर्ती विज्ञापन अनुसूचित जाति को 65 प्रतिशत से अधिक आरक्षण शिक्षक एवं सहायक शिक्षक के पद पर दिया गया है। इससे अन्य वर्ग का हित प्रभावित हो रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने विज्ञापन को चुनौती देते हुए याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई करते हुई। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से बताया गया कि कुल बैकलॉग पद जुडे होने की वजह से इस प्रकार का आरक्षण किया गया है। जिस पर याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि विज्ञापन में कितने पद बैकलॉग के हैं और किस वर्ग के हैं, यह नहीं बताया गया है। यदि बैकलॉग के पद हैं, तो उसे विज्ञापन में अधिसूचित किया जाना आवश्यक है।
लेकिन बिना किसी विवरण के शासन अनुसूचित जनजाति को नियम विरूद्ध आरक्षण नहीं सकती। सुनवाई के बाद जस्टिस पी सेम कोशी की एकलपीठ ने शासन से जवाब तलब करते हुए भर्ती प्रक्रिया को इस याचिका के निर्णय से बाधित रखा है।

