रायपुर : छत्तीसगढ़ का टाइगर अब झारखंड में दहाड़ रहा है. आपको बता दे कि, पिछले एक सप्ताह से रामानुजगंज व बलरामपुर रेंज में बाघ के चलने का निशान देखा गया है. जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना हुआ था. फिर उसी दिन देर शाम को उसे झारखंड के ग्राम पिपराही में देखे जाने की जानकारी गांव वालों ने दी.
इस बीच वन विभाग बलरामपुर के अफसरों की एक टीम बाघ के झारखंड चले जाने की पुष्टि करने झारखंड भी गए हैं. वहीं झारखंड के फॉरेस्ट अफसरों को भी इसकी सूचना दे दी गई है. छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रामानुजगंज रेंज में विचरण करने के बाद बाघ झारखंड के गढ़वा जिले में पिपराही जंगल पहुंच गया है. इसके बाद ही छत्तीसगढ़ के इस सीमावर्ती इलाके में दहशत का माहौल बना हुआ है. बलरामपुर वन विभाग की एक टीम इसीलिए पल-पल की जानकारी जुटा रही है.
बता दें कि रामानुजगंज वन परिक्षेत्र में 6 दिनों से बाघ घूम रहा था। अब तक बाघ के हमले से तीन मवेशियों की मौत हो चुकी है। सेंदुर के कजरी टोला निवासी राम लाल ने बताया कि बाघ के डर से जंगल किनारे खेतों में वे काम करने नहीं जा रहे हैं। सबसे अधिक बच्चों की चिंता रहती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए, क्योंकि दो दिन पहले यहां के रिहायशी क्षेत्र मे लोगों की भीड़ देखकर बाघ इधर-उधर दौड़ने लगा है।
इन सबके बीच बलरामपुर के सीमावर्ती इलाकों के लोगाें को अब भी सतर्क रहने के लिए कहा जा रहा है, क्योंकि बाघ की वापसी भी कभी भी हो सकती है. जानकारी के लिए बता दें कि जिले में 23 फरवरी से गुरु घासीदास उद्यान की ओर से वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में बाघ के मूवमेंट की जानकारी लगातार मिल रही थी. इस दौरान उसने आसपास के गांवों के पालतू पशुओं का शिकार भी किया. वह लगातार आबादी इलाकों के नजदीक भी पहुंच रहा था. इसे देखते हुए वन विभाग के साथ ही जिला प्रशासन और पुलिस के अफसर भी सक्रिय थे.
