रायपुर : छत्तीसगढ़ में धर्मांतरित व्यक्तियों की अनुसूचित जनजाति की सूची बाहर करने की मांग को लेकर रविवार को राजधानी रायपुर में डीलिस्टिंग महारैली का आयोजन किया गया । जनजाति सुरक्षा मंच छत्तीसगढ़ के बैनर तले आयोजित रैली में आरक्षण और धर्मांतरण का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। डीलिस्टिंग महारैली में बड़ी संख्या में जनजाति समाज के लोग शामिल हुए। रैली से पहले सभा के जरिए डीलिस्टिंग की मांग उठाने की जरूरत पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश भी डाला गया।
संगठन के जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, भोजराज नाग (संयोजक), रोशन प्रताप सिंह (संयोजक) और संगीता पोया (सह-संयोजिका) ने कहा- दरअसल जनजाति समाज को आरक्षण इसीलिए दिया गया है ताकि उनकी सामाजिक, आर्थिक स्थितियों को ऊपर उठाया जा सके। लेकिन जनजाति आरक्षण का मूल उद्देश्य तब अर्थहीन हो जाता है, जब जनजाति अपने मूल संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को अस्वीकार कर दूसरे धर्म में परिवर्तित हो जाता है तो वह जनजातियों को मिलने वाले लाभों को उठाने का पात्र कैसे हो सकता है ?
जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से मांग की गई कि जिन नागरिकों ने अपने मूल संस्कृति और अपने मूल धर्म को छोड़कर विदेशी धर्म अपनाया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति किस श्रेणी से तत्काल बाहर किया जाए, और इसके लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन किया जाए। मंच की ओर से इसके साथ यह भी कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों के द्वारा मूल जनजातियों के हिस्से की सुविधाओं को अवैध रूप से छीना जा रहा है, इसलिए धर्मांतरितों को डिलिस्टिंग किया जाए।

