कोरबा : छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के नाम पर हमेशा से ही राजनीति होती आयी हैं,फिर वो चाहे गरीब आदिवासी हो….या फिर आदिवासी छात्र-छात्रांए । जीं हां आदिवासी छात्र और छात्रावास से जुड़ी कुछ ऐसी ही खबर कोरबा से सामने आ रही हैं, यहां आदिवासी विभाग एक बार फिर चर्चा में हैं। ताजा मामला आदिवासी विभाग के छात्रावासों के मरम्मत और सामान खरीदी के लिए केंद्र सरकार से मिले करोड़ो रूपये के फंड की मूल नश्ती ही कार्यायल से गायब हो गयी हैं।
बताया जा रहा हैं कि 6 करोड़ 62 लाख रूपये में करीब 3 करोड़ रूपये का विभाग ने कई एजेंसिंयों को भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन किस काम के एवज में कितना भुगतान किया गया…..इससे जुड़े सारे दस्तावेज ही विभाग से गायब हैं। ऐसे में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ने दस्तावेजन नही मिलने पर मामले में एफआईआर दर्ज कराने की बात कही हैं। गौरतलब हैं कि छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला केंद्र सरकार की आकांक्षी जिला की सूची में दर्ज होने के साथ ही आदिवासी बाहुल्य जिला घोषित हैं।
ऐसे में कोरबा जिला में संचालित आदिवासी बालक-बालिक छात्रावासों में पढ़ने वाले छात्रों के बेहतरी और उज्जवल भविष्य के लिए प्रदेश सरकार के साथ ही केंद्र सरकार भी विशेष पैकेज प्रदान करती हैं। मौजूदा वक्त में केंद्र सरकार से वर्ष 2021-21 में परियोजना मद से अनुच्छेद 275 (1) के तहत कोरबा जिला को 6 करोड़ 62 लाख 29 हजार रूपये केंद्र सरकार ने जारी किया था। इस मद से कोरबा जिला में संचालित आदिवासी आश्रम,छात्रावासों के लिए जरूरी सामानों की खरीदी के साथ ही मरम्मत का कार्य कराया जाना था।
बताया जा रहा हैं कि तत्कालीन सहायक आयुक्त माया वारियन के द्वारा इस मद से कई छात्रावासों में कार्य कराने के साथ ही छात्रावास और आश्रमों के लिए आवश्यक सामानों की खरीदी की गयी। इसके एवज में करीब 3 करोड़ रूपये का फंड भी संबंधित एजेंसिंयों को जारी किया गया। लेकिन इसी बीच राज्य स्तर से सहायक आयुक्त का तबादला आदेश जारी हो गया। इस बीच 25 मार्च को नवपदस्थ सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने विभाग की कमान संभाली। सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर की माने तो केंद्र सरकार से मिले फंड की सारी जानकारी और कार्यो की प्रगति “आदि ग्राम पोर्टल” पर अपलोड किया जाना होता हैं।
चूकि वित्तीय वर्ष की समाप्ति में कार्य का स्टेटस अपलोड करने के लिए उक्त कार्यो की जानकारी जब विभाग से जाननी चाही गयी, तो विभाग से सारे रिकार्ड ही गायब मिले। सहायक आयुक्त श्रीकांत कसेर ने बताया कि केंद्र सरकार से मिले फंड से किन-किन छात्रावासों में क्या काम कराये गये या फिर किन किन सामनों की खरीदी की गयी, इस संबंध में विभाग में एक भी रिकार्ड मौजूद नही हैं। उन्होने बताया कि 31 मार्च 2023 की तिथि तक बैंक से पेमेंट का भुगतान किया गया हैं।
बैंक स्टेटमेंट निकाला गया हैं, लेकिन उक्त स्टेटमेंट में भी फर्म या एजेंसी की उल्लेख नही होने के कारण खर्च की विस्तृत जानकारी अभी तक नही मिल पायी हैं। सहा.आयुक्त श्रीकांत कसेर ने बताया कि विभाग से रिकार्ड के साथ ही वित्तीय पंजी, एमबी बूक सहित कई दस्तावेजों के गायब होने का मामला काफी गंभीर हैं। लिहाजा मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल संबंधित विभाग के बाबू अमन राम को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर सारे दस्तावेज और मूल नश्ती प्रस्तुत करने का आदेश दिया गया हैं।
अगर समय पर दस्तावेज नही प्रस्तुत नही किये जाते हैं, तब इस मामले में पुलिस में एफआईआर दर्ज कराया जायेगा। सहा.आयुक्त श्रीकांत कसेर ने साफ किया कि केंद्र सरकार से मिले फंड की एक-एक जानकारी सरकार को देनी होती हैं। ऐसे में विभाग से दस्तावेजों की मूल नश्ती का ही गायब होना काफी गंभीर प्रकरण हैं। ऐसे में इस मामले में उच्च अधिकारियों को जानकारी देने के साथ ही पूरे प्रकरण पर सख्ती से कार्रवाई की जायेगी। इस पूरे प्रकरण में जो भी दोषी होगा उसे बख्शा नही जायेगा।

