रायपुर:- छत्तीसगढ़ की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. साल 2017-18 में राज्य की सियासत में भूचाल लाने वाले कथित सीडी कांड में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं. रायपुर सेशन कोर्ट ने सीबीआई की रिव्यू पिटिशन को मंजूर करते हुए निचली अदालत का वह फैसला पलट दिया है, जिसमें भूपेश बघेल को बरी किया गया था. अब इस पूरे मामले में भूपेश बघेल समेत सभी आरोपियों के खिलाफ नियमित ट्रायल चलेगा।कोर्ट ने भूपेश बघेल को नियमित रूप से पेश होने के निर्देश दिए हैं. मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी को होगी.
भूपेश बघेल के खिलाफ सेशन कोर्ट ने पलटा फैसला
CBI की विशेष अदालत ने मार्च 2025 में भूपेश बघेल को इस मामले से बरी कर दिया था. कोर्ट का कहना था कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है. लेकिन इस फैसले को CBI ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी. अब सेशन कोर्ट ने CBI की याचिका मंजूर करते हुए निचली अदालत का फैसला रद्द कर दिया है.
अब भूपेश बघेल पर भी चलेगा मुकदमा
सेशन कोर्ट के इस फैसले के बाद भूपेश बघेल के खिलाफ भी अन्य आरोपियों के साथ ट्रायल चलेगा। कोर्ट ने उन्हें नियमित रूप से पेश होने का आदेश दिया है. इससे पहले निचली अदालत के फैसले के बाद उन्हें बड़ी राहत मिली थी.
कैलाश मुरारका और विनोद वर्मा को भी नहीं मिली राहत
कारोबारी कैलाश मुरारका और पूर्व मुख्यमंत्री के सलाहकार विनोद वर्मा ने भी खुद को आरोपों से मुक्त करने के लिए आवेदन लगाया था, लेकिन सेशन कोर्ट ने उनके आवेदन खारिज कर दिए. कोर्ट ने कहा कि इनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं और इन्हें ट्रायल का सामना करना होगा.
सीडी कांड में कौन-कौन हैं आरोपी
इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अलावा कारोबारी कैलाश मुरारका, विनोद वर्मा, विजय भाटिया और विजय पांड्या आरोपी हैं। वहीं इस केस के एक अन्य आरोपी रिंकू खनूजा ने मामले के सामने आने के बाद आत्महत्या कर ली थी.
सीडी कांड से बदली थी छत्तीसगढ़ की राजनीति
सितंबर 2018 में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा की गिरफ्तारी ने प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था. विधानसभा चुनाव से ठीक तीन महीने पहले हुई इस कार्रवाई को कांग्रेस ने राजनीतिक साजिश बताया था। भूपेश बघेल ने उस वक्त जमानत लेने से इनकार कर दिया था और यह मामला कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया.

