बिलासपुर : बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर राज्य शासन ने पीएचई के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया है।बता दें कि भाजपा विधायकों ने विधानसभा में यह मुद्दा जोर-शोर से उठाया था। पीएचई मंत्री रुद्र कुमार गुरु जब सदन में घिरे, तब आसंदी से स्पीकर डॉ. चरणदास महंत ने गड़बड़ियों की जांच करने के लिए कहा था। आखिरकार विभाग ने ईई एसके चंद्रा को सस्पेंड कर दिया है।
जल जीवन मिशन में पीएचई के ईई एसके चंद्रा के खिलाफ अपने कार्यकाल में ढेरों गड़बड़ियां करने की शिकायत मिली थी। इन्होंने टेंडर नियमों में जमकर गड़बड़ियां की थी। टेंडर जारी करने के पूर्व पेपर प्रकाशन व निश्चित समयावधि का पालन नही करने समेत टेंडर को 35 फीसदी अधिक दर पर जारी करने समेत बिना नियमों का पालन किए टेंडर जारी किया था। विधानसभा में विधायक कृष्णमूर्ति बांधी के द्वारा सवाल उठने के बाद 15 टेंडर निरस्त भी किए गए थे।
शीतकालीन सत्र में विपक्ष ने 100 करोड़ की गड़बड़ियों का आरोप लगाया था। एनएसयूआई ने भी उनके साथ ही ईई, सीई, ईएनसी के खिलाफ एफआईआर करवाने थाने में आवेदन दिया था। इसके बाद ईई एसके चन्द्रा को लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अवर सचिव रविंद्र कुमार मेंढेकर ने निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर अटल नगर होगा।
ईडी ( प्रवर्तन निदेशालय) ने दो वर्ष पूर्व ईई एसके चन्द्रा की जांजगीर व बिलासपुर की सम्पतियां व बैंक में जमा राशि, घर व जमीन के रूप में कुल 1 करोड़ 72 लाख की संपत्ति अटैच की थी। इसके अलावा जगदलपुर में पदस्थ रहते हुए भी एक मामले में उन्हें निलंबित किया गया था। फिर कोरबा में पदस्थापना के दौरान 2016 में एंटी करप्शन ब्यूरो ने रेड मारकर 8 करोड़ की काली कमाई उजागर की थी। तब भी इन्हें निलंबित कर दिया गया था। इस मामले में आय से अधिक संपत्ति का प्रकरण फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है।