रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष शिवरतन शर्मा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की हालिया बयानबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा कि लगातार चुनावी पराजय और नगरीय निकाय चुनाव में हार की आशंका से बघेल मानसिक संतुलन खो चुके हैं।
“भूपेश बघेल के बयान अस्वीकार्य” – शिवरतन शर्मा
शिवरतन शर्मा ने कहा कि भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन को लेकर भूपेश बघेल की टिप्पणी पूरी तरह से अनुचित और अस्वीकार्य है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक संवाद में शालीनता और मर्यादा होनी चाहिए, लेकिन बघेल अपनी हताशा में अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि नितिन नबीन ने प्रदेश के हर कोने में संगठन को मजबूत किया, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा।
“भूपेश बघेल अपना आपा खो चुके हैं”
भाजपा नेता ने कहा कि लगातार हो रही हार को पचा न पाने की वजह से पूर्व मुख्यमंत्री असंतुलित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “जनता ने उनके कार्यों की सजा दे दी है। अब उन्हें आत्मचिंतन करना चाहिए, बजाय इसके कि वे बौखलाहट में गलत बयानबाजी करें।”
“कांग्रेस में भी अस्वीकार्य हो गए हैं बघेल”
शर्मा ने दावा किया कि बघेल अब न केवल जनता के बीच अलोकप्रिय हो चुके हैं, बल्कि कांग्रेस पार्टी में भी वे अप्रासंगिक हो गए हैं। उन्होंने हाल ही में नेता प्रतिपक्ष टी.एस. सिंहदेव महंत द्वारा बघेल के नेतृत्व को दी गई चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि “अब जब उनकी राजनीतिक जमीन खिसक चुकी है, तो उन्हें राजनीति छोड़ देनी चाहिए।”
“भ्रष्टाचार और वादाखिलाफी ने कांग्रेस को डुबो दिया”
भाजपा उपाध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि अपार बहुमत से सत्ता में आने के बावजूद भ्रष्टाचार, वादाखिलाफी और अक्षमता की वजह से कांग्रेस ने जनता का विश्वास खो दिया। उन्होंने कहा, “भूपेश बघेल की अनर्गल बयानबाजी ने कांग्रेस की डूबती नैया को और गर्त में पहुंचा दिया है। अगर वे इसी तरह बोलते रहे, तो कांग्रेस का बचा-खुचा आधार भी समाप्त हो जाएगा।”
“भाजपा कार्यकर्ता बेजा बयानबाजी सहन नहीं करेंगे”
अंत में, शिवरतन शर्मा ने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि वे पूर्व मुख्यमंत्री को समझाएं और मर्यादित भाषा का प्रयोग करने की सीख दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भाजपा कार्यकर्ता अपने नेताओं के खिलाफ अनर्गल बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं करेंगे। यह बयान आगामी चुनावों से पहले छत्तीसगढ़ की राजनीति में बढ़ते तनाव और तीखी बयानबाजी को दर्शाता है।

