भिलाई: छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र में हड़ताल का मिला जुला असर दिखा. हालांकि झमाझम बारिश ने हड़ताल की शुरुआत को प्रभावित किया. बीएसपी के बोरिया गेट और मुर्गा चौक पर यूनियन नेताओं ने प्रदर्शन किया, लेकिन भारी बारिश के कारण कम संख्या में ही कर्मचारी पहुंच सके. संयंत्र की प्रथम पाली में उत्पादन सामान्य रहा और हड़ताल का कोई खास असर नहीं पड़ा.
मुर्गा चौक पर मजदूरों का हल्ला बोल: भिलाई के मुर्गा चौक पर यूनियन नेताओं ने केंद्र सरकार और सेल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए. वंश बहादुर सिंह, इंटक नेता ने कहा कि कर्मचारियों के हक का 39 माह का एरियर रोकना पूरी तरह से अवैध है. यह पैसा कर्मचारियों की मेहनत का है, जिसे अफॉर्डेबिलिटी क्लॉज के नाम पर रोकना संविधान और 1970 के त्रिपक्षीय समझौते का उल्लंघन है.
वेतन और ग्रेच्युटी को लेकर प्रदर्शन: यूनियन नेताओं ने कहा कि समझौते के तहत कर्मचारियों को असीमित ग्रेच्युटी मिलनी चाहिए थी, लेकिन केंद्र सरकार की सिफारिश पर उसे सीमित कर दिया गया. वेतन समझौते को लेकर भी यूनियनों में भारी नाराजगी है.
मजदूरों को हो रहा नुकसान: यूनियन नेताओं ने कहा कि नियमों के मुताबिक, पिछले वेतन समझौते के समाप्त होने के 6 माह पहले नए वेतन समझौते की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन 2020 से अब तक यानी 8 साल 6 माह बीत जाने के बाद भी वेतन समझौता अधूरा है, जिससे कर्मचारियों को आर्थिक और मानसिक नुकसान झेलना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि ठेका श्रमिकों को मासिक वेतन 26 हजार रुपए देना चाहिए नहीं तो उग्र प्रदर्शन किया जाएगा.
मजदूर यूनियन के नेताओं ने खोला मोर्चा: स्टील ठेका श्रमिक के नेता संजय साहू ने बताया कि पेंशन फंड को लेकर भी भेदभाव के आरोप लगे हैं. अधिकारियों को 9 प्रतिशत योगदान दिया गया, जबकि कर्मचारियों के लिए 6 प्रतिशत से अधिक न देने के तर्क दिए गए, जिसे यूनियन नेताओं ने बेबुनियाद बताया.यूनियन नेताओं ने कहा कि जब बात अधिकारियों की आती है तो प्रबंधन तत्परता से फंड मुहैया कराता है, लेकिन मजदूरों के लिए हर बार अड़चनें खड़ी की जाती हैं. हड़ताल के माध्यम से यूनियनों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.