खैरागढ़:- गर्मी का मौसम शुरू होते ही लोग ठंडक पाने के लिए आइसक्रीम, आइस कैंडी और बर्फ के गोलों का सहारा लेते हैं. खासकर बच्चे इन्हें बहुत पसंद करते हैं. लेकिन छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले के साल्हेवारा से आई एक खबर ने सभी को चौंका दिया है. एक फैक्ट्री में छापामार कार्रवाई की गई जहां बिना एक्सपायरी डेट या कोई जानकारी लिखे प्रोडक्ट पैक किए गए थे. साथ ही इसका लाइसेंस भी नहीं था.
बिना लाइसेंस चल रही थी फैक्ट्री
27 मार्च को खाद्य एवं औषधि प्रशासन को सूचना मिली कि साल्हेवारा में एक आइस फैक्ट्री बिना लाइसेंस के चलाई जा रही है. सूचना मिलते ही टीम ने तुरंत छापा मारा. जब अधिकारी अंदर पहुंचे, तो वहां का नजारा बेहद गंदा और चौंकाने वाला था. गंदगी के बीच आइसक्रीम और आइस कैंडी बनाई जा रही थी और साफ-सफाई का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा जा रहा था.
उत्पादों पर जरूरी जानकारी गायब
जांच के दौरान यह सामने आया कि तैयार किए गए आइस प्रोडक्ट्स पर न बैच नंबर था, न निर्माण तिथि और न ही एक्सपायरी डेट लिखी थी. इसका मतलब है कि लोग बिना जानकारी के असुरक्षित चीजें खा रहे थे, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकती हैं.
हजारों आइस प्रोडक्ट जब्त और नष्ट
कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने लगभग 5000 चोकोबार आइसक्रीम पैकेट, पैकेजिंग सामग्री और आइसक्रीम कोन जब्त किए. इन्हें तीन फ्रीजर में सीज कर दिया गया. साथ ही करीब 3000 ऑरेंज कैंडी को मौके पर ही नष्ट कर दिया गया. जब्त किए गए सामान की कुल कीमत लगभग एक लाख रुपए बताई गई है.
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि फैक्ट्री के पास कोई वैध लाइसेंस नहीं था. इसके बाद प्रशासन ने आदेश दिया कि जब तक सभी नियमों का पालन नहीं किया जाएगा, तब तक फैक्ट्री में उत्पादन, भंडारण और बिक्री पूरी तरह बंद रहेगी. अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसे अवैध कारोबारियों पर लगातार नजर रखी जाएगी.
बच्चों की सेहत पर बड़ा खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, गंदगी में बने आइस प्रोडक्ट्स बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होते हैं. इनमें दूषित पानी, सस्ते रंग और हानिकारक केमिकल मिलाए जा सकते हैं. इससे फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त, पेट दर्द और टाइफाइड जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. छोटे बच्चों पर इसका असर और ज्यादा तेजी से होता है.

