नई दिल्ली :- सनातन धर्म में सूर्य और चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है, जबकि विज्ञान इसे केवल खगोलीय घटना के रूप में देखता है. इस वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्रग्रहण 7 सितंबर 2025 को लगेगा, जो पितृपक्ष के पहले दिन आएगा. हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रग्रहण का मानव जीवन, स्वास्थ्य और धार्मिक कार्यों पर सीधा प्रभाव पड़ता है.
ज्योतिषाचार्य डॉ. उमाशंकर मिश्र ने बताया कि 7 सितंबर को भाद्रपद मास की पूर्णिमा तिथि रहेगी. भारतीय समयानुसार यह ग्रहण रात 9 बजकर 57 मिनट पर शुरू होगा और रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा. कुल मिलाकर यह ग्रहण लगभग 3 घंटे 30 मिनट तक रहेगा. यह चंद्रग्रहण न केवल भारत, बल्कि पूरे एशिया, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका, न्यूजीलैंड, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका में भी देखा जा सकेगा.
ग्रहण के दृष्टिगत भारत में सूतक काल लागू होगा. शास्त्रों के अनुसार, चंद्रग्रहण से 9 घंटे पहले सूतक प्रारंभ हो जाता है. इस बार सूतक 7 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 57 मिनट से शुरू होगा. सूतक काल में मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और देव विग्रह के स्पर्श से परहेज करना चाहिए. इस दौरान भोजन ग्रहण नहीं करना चाहिए और घर में साफ-सफाई और नियमों का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है.
डॉ. मिश्र ने कहा कि ग्रहण काल के दौरान जप, तप और पूजा का विशेष महत्व है. शास्त्रों के अनुसार, इस समय किए गए धार्मिक कर्म सामान्य समय की तुलना में 100 गुना अधिक फलदायी होते हैं. गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. साथ ही ग्रहण के दौरान सब्जी काटने या किसी भी तरह की सामग्री काटने से परहेज करना चाहिए.