जब ब्रेस्ट कैंसर की बात आती है, तो ज्यादा लोगों के दिमाग में सबसे पहले ब्रेस्ट में गांठ होने का ख्याल आता है. इसी वजह से, कई औरतें अगर गांठ महसूस न हो तो ब्रेस्ट कैंसर की संभावना को पूरी तरह से नकार देती हैं. हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर हमेशा गांठ के रूप में ही सामने नहीं आता है. कुछ मामलों में, ब्रेस्ट की स्किन, उसके आकार, निप्पल या आस-पास के हिस्सों में बदलाव भी इस बीमारी के संकेत हो सकते हैं.
जयपुर के HCG कैंसर हॉस्पिटल में सर्जिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. तेज प्रताप सिंह का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर में, ब्रेस्ट टिशू के अंदर असामान्य सेल्स बढ़ने लगते हैं. बीमारी के प्रकार और स्टेज के आधार पर लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं. शुरुआती स्टेज में, कुछ औरतों को कोई भी खास लक्षण महसूस नहीं हो सकते हैं. सिर्फ इसलिए, कैंसर की संभावना को नजरअंदाज करना सही नहीं है क्योंकि कोई गांठ महसूस नहीं हो रही है.
किन बदलावों पर ध्यान देना चाहिए?
स्तन के आकार या बनावट में अचानक बदलाव आना
त्वचा पर गड्ढे पड़ना
त्वचा का सिकुड़ जाना या संतरे के छिलके जैसी दिखाई देने लगना
निप्पल का अचानक अंदर की ओर मुड़ जाना
निप्पल या उसके आसपास की त्वचा में बदलाव आना, या बिना किसी स्पष्ट कारण के निप्पल से कोई तरल पदार्थ निकलना (खासकर अगर उसमें खून हो) तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
बगल में गांठ या सूजन महसूस होना भी एक ऐसा संकेत है, जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डॉ. तेज प्रताप सिंह के मुताबिक, हालांकि, इन बदलावों का मतलब यह नहीं है कि हर मामले में कैंसर ही हो. हार्मोनल बदलाव, संक्रमण और कैंसर से जुड़ी न होने वाली अन्य स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती है. इसलिए जांच करवाना बेहद जरूरी है. जांच के बाद ही सही कारण का पता चल सकता है.
सिर्फ गांठ की जांच ही काफी नहीं, लगातार जागरूक रहना भी है जरूरी
अपने स्तनों में होने वाले सामान्य बदलावों को समझना मददगार होता है. अगर कोई नया या असामान्य बदलाव दिखाई दे और बना रहे, तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए. दर्द न होने का मतलब यह नहीं है कि कोई गांठ या अन्य बदलाव नुकसानरहित है.
इसके अलावा, जिन महिलाओं में कोई लक्षण नहीं दिखते, उनके लिए उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के आधार पर स्क्रीनिंग कराना महत्वपूर्ण हो सकता है. मैमोग्राफी या अन्य जरूरी जांच कराने का फैसला डॉक्टर की सलाह से लेना चाहिए. जिन महिलाओं के परिवार में ब्रेस्ट कैंसर का इतिहास रहा है या जिनमें अन्य जोखिम कारक मौजूद हैं, उन्हें स्क्रीनिंग शुरू करने की सही उम्र और इसे कितनी बार कराना चाहिए, इस बारे में डॉक्टर से विशेष सलाह लेनी चाहिए.
ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता का अर्थ केवल गांठ को पहचानना नहीं, बल्कि शरीर में होने वाले असामान्य बदलावों को गंभीरता से लेना भी है. समय पर चिकित्सकीय परामर्श और उचित जांच बीमारी की पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

