दुर्ग:- मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है. अज्ञात आरोपी ने खुद को चुनाव आयोग का अधिकारी बताकर निजी कंपनी में डीजीएम के पद पर कार्यरत शख्स को निशाना बनाया. आरोपी ने निजी कंपनी के अधिकारी को उनके पिता का नाम मतदाता सूची में गलत दर्ज होने की बात कही और सुधार के लिए व्हाट्सऐप पर एक लिंक भेजा.
निजी कंपनी के अधिकारी से लाखों की ठगी
शिकायत के मुताबिक, लिंक के जरिए फॉर्म भरने की प्रक्रिया पूरी करने के बाद उनके बैंक खाते से 6 लाख 25 हजार रुपए निकल गए. मामले में भिलाई-3 थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. शिकायत के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2026 को पीड़ित के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सऐप कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को चुनाव आयोग का अधिकारी बताया और कहा कि SIR प्रक्रिया में उनके पिता का नाम गलत दर्ज है. इसे सुधारने के लिए जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होगी.
लिंक भेजकर 6 लाख 25 हजार निकाल
इसके बाद आरोपी ने उन्हें व्हाट्सऐप पर एक लिंक भेजा और उसके जरिए फॉर्म भरने को कहा. पिता के नाम में सुधार की बात को चुनाव से जुड़ी सामान्य प्रक्रिया समझकर शिकायतकर्ता ने लिंक के जरिए फॉर्म फिलअप कर दिया. आरोप है कि इसके बाद उनके बैंक खाते से 6 लाख 25 हजार रुपए की रकम निकाल ली गई. पीड़ित के आवेदन में बैंक रिकॉर्ड के आधार पर लेनदेन का तरीका IMPS बताया गया है. घटना के बाद पीड़ित ने साइबर अपराध से जुड़ी ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है.
एसआईआर फॉर्म भरने के नाम पर फर्जीवाड़ा
जिसके बाद 9 अक्टूबर को भिलाई-3 थाना प्रभारी के नाम लिखित आवेदन देकर कार्रवाई करने और ठगी की रकम वापस दिलाने की मांग की. पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है. फिलहाल पुलिस आरोपी की पहचान, व्हाट्सऐप कॉल में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर और बैंक लेनदेन की जांच कर रही है.
ट्रांसफर रकम और खातों की होगी जांच
जांच के बाद ही पता चल सकेगा कि ठगी की रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई और इस पूरे मामले में कौन-कौन शामिल है. यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन लिंक के जरिए होने वाली साइबर ठगी को लेकर सतर्क रहने की जरूरत बताता है. किसी भी सरकारी प्रक्रिया के नाम पर अनजान व्यक्ति से लिंक मिलने पर उसकी सत्यता की पुष्टि जरूर करें.

