बेमेतरा:- वन्यजीवों के साथ कई गई क्रूरता की एक दर्दनाक खबर ग्राम देवगांव के डोकरबेला से सामने आई है. यहां दाढ़ी थाना इलाके में एक साथ 22 बंदरों की मौत हो गई है. आरोप है कि फसलों की रखवाली करने वाले रखवार ने अपनी बंदूक से अंधाधुंध फायरिंग कर कथित तौर पर 22 बंदरों को मौत के घाट उतार दिया.
22 बंदरों की मौत से गुस्से में ग्रामीण
22 बंदरों की कथित सामूहिक हत्याकांड के बाद इलाके में गुस्से में माहौल है. लोगों का कहना है कि अगर बंदरों की हत्या हुई है, तो उसकी सजा दोषी को मिलनी चाहिए. पुलिस का कहना है कि उनको भी बंदरों की मौत की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए लगी है. पुलिस ने दावा किया है कि जांच के बाद अगर बंदरों की हत्या किए जाने की बात सामने आती है, तो सख्त से सख्त कार्रवाई दोषी के खिलाफ की जाएगी. ग्राम देवगांव के लोगों ने बताया कि ठीक इसी तरह की एक और घटना पिछले साल साजा ब्लॉक के बेलगांव में भी हुई थी.
सोशल मीडिया के जरिए हुआ खुलासा
जहां पुलिस को घटना की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए लगी. वहीं स्थानीय लोगों को भी इस बारे में सोशल मीडिया से ही पता चला, जिसके बाद लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. लोगों का कहना है कि कोई कैसे बंदरों को इतनी निर्ममता के साथ गोली मार सकता है. लोगों का कहना है कि अगर बंदर फसल बर्बाद भी कर रहे थे, तो उनको भगाने का उपाय किया जा सकता था, गुस्से में आकर बंदरों को मारना किसी तरह से उचित और न्यायोचित नहीं है.
बंदरों की मौत पर गुस्से में स्थानीय लोग
कुछ स्थानीय ग्रामीणों का तो यहां तक दावा है कि एक के बाद एक कर कुल 22 बंदरों को मौत के घाट उतारा गया. वहीं ये भी कहा जा रहा है कि कई बंदर बुरी तरह से जख्मी भी हुए हैं. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि घुमंतू मवेशी और बंदरों से फसलों की सुरक्षा के लिए कुछ जगहों पर रखवार रखे गए हैं. रखवार को प्रत्येक किसान की ओर 2 किलो चावल प्रति दिन दिया जाता है. बदले में रखवार किसानों की फसलों की रक्षा करता है. लोगों का कहना है कि रखवार को चाहिए था कि वो बंदरों को भगाए न कि उसे मार डाले.
वन विभाग और पुलिस टीम पहुंची घटनास्थल
घटना के तुरंत बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने एकजुट होकर वन विभाग के रेंजर और स्थानीय पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत मिलने के बाद विभाग की संयुक्त टीम शनिवार को घटना स्थल पर पहुंची और मृत बंदरों के शवों की वास्तविक संख्या का पता लगाने की कोशिश की. उसके बाद बंदरों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया गया.

