रायबरेली:- उत्तर प्रदेश में दावा तो राम राज का किया जाता है। सरकार भी अपने काम की तारीफ करते नहीं थकती, लेकिन सरकारी अधिकारी-कर्मचारी ही सरकार के रामराज के सपनों को ध्वस्त करते हुए नजर आ रहे हैं। जी हां उत्तर प्रदेश के सरकारी अधिकारी इतने बेलगाम हो चुके हैं कि रिश्वत में अब गरीबों की बहन-बेटियां मांग रहे हैं। हैरानी की बता तो ये है कि पीड़ित पिता जब लेखापाल की शिकायत लेकर एसडीएम के पास पहुंचा तो वो भी मामले की गंभीरता को नजरअंदाज कर हंसने लगे। वहीं, जब मामला कांग्रेस नेताओें तक पहुंचा तो सियासी गलियारे में बवाल मच गया, जिसके बाद लालगंज क्षेत्राधिकारी को जांच के लिए निर्देश दिया गया है।
लेखापाल ने रिश्वत में मांगी गरीब की बेटी
मिली जानकारी के अनुसार मामला लालगंज तहसील का है, जहां रहने वाले गरीब परिवार का शख्स सरकारी मदद के लिए तहसील कार्यालय पहुंचा था। यहां उन्होंने अपनी हालत बताते हुए सरकारी मदद दिलाने की गुहार लगाई। गरीब की गुहार सुनने के बाद लेखापाल ने सरकारी मदद दिलाने के बदले रिश्वत की मांग, जिस उस याचक ने आर्थिक हालत खराब होने का हवाला देते हुए रिश्वत देने से इंकार कर दिया है। वहीं, रिश्वत नहीं मिलने पर लेखापाल ने कहा कि अपनी बेटी को भेज देना काम हो जाएगा।
कांग्रेस ने सत्ता पक्ष को लिया आड़े हाथों
वहीं, मामले की जानकारी होने पर कांग्रेस ने एक्स पर पीड़ित परिवार का वीडियो पोस्ट करते हुए यूपी की योगी सरकार पर हमला बोला है। कहा कि योगी जी के राज में कानून और इंसानियत दोनों दम तोड़ रहे हैं। रायबरेली से सामने आया यह मामला इस बात का सबसे खौफनाक सबूत है। गरीबी से टूटे परिवार की मजबूरी का फायदा उठाकर क्षेत्रीय लेखपाल दिनेश कुमार सविता ने मदद की रिपोर्ट लगाने के एवज में जो शर्मनाक मांग रखी, वह किसी भी इंसान की रूह कंपा देने के लिए काफी है। जब एक बेटी की माँ ने पैसे देने में असमर्थता जताई तो उस दरिंदे लेखपाल ने अपनी हवस पूरी करने के लिए सीधे कह दिया कि “काम करवाना है तो बेटी को मेरे पास भेज दो!”
कार्रवाई के बजाए हंसने लगे एसडीएम
कांग्रेस ने कहा कि हद तो तब हो गई जब पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लेकर एसडीएम के पास पहुंचा तो साहब न्याय करने के बजाय हंसने लगे। अधिकारी की इस संवेदनहीनता और क्रूर हंसी ने यह साफ कर दिया कि इस तंत्र में गरीबों और पीड़ितों की सुनने वाला कोई नहीं है। आरोपी लेखपाल के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होना इस पूरी व्यवस्था के माथे पर एक बड़ा कलंक है। कहा कि जब रखवाले ही भक्षक बन जाएं और प्रशासन अपराधियों की ढाल बन जाए तो जनता किससे उम्मीद करे? इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच करके लेखपाल और असंवेदनशील अधिकारी पर तुरंत सबसे कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

