हमारे देश में खांसी सबसे आम लक्षणों में से एक है, जो अक्सर वायरल इन्फेक्शन, एलर्जी या मौसम में बदलाव के कारण होती है. यह एक ऐसी स्थिति है जिसके लिए प्राइमरी हेल्थकेयर (OPD) में सबसे ज्यादा लोग डॉक्टरी सलाह लेते हैं. एक भारतीय स्टडी के अनुसार, प्राइमरी केयर सेंटर्स में आने वाले लगभग 30 फीसदी से 41 फीसदी मरीजों में खांसी एक मुख्य लक्षण होती है. हालांकि, अगर खांसी बनी रहती है, बार-बार होती है या उसका स्वरूप बदल जाता है, तो बिना असली वजह का पता लगाए बार-बार उसका इलाज खुद से नहीं करना चाहिए.
सीके बिरला हॉस्पिटल्स जयपुर में इंटरनल मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर और जाने-माने जनरल फिजिशियन डॉ. सुशील कालरा सलाह देते हैं कि लगातार या बार-बार होने वाली खांसी को सिर्फ आम वायरल इन्फेक्शन या मौसम बदलने का नतीजा मानकर नजरअंदाज न करें. अगर खांसी का तरीका बदल जाए या वह ठीक न हो, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है ताकि असली वजह का पता चल सके और खुद से इलाज करने या गलत दवाइयों के बार-बार इस्तेमाल से होने वाले खतरों से बचा जा सके.
डॉ. सुशील कालरा बताते हैं कि एक इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट के तौर पर, उन्हें अक्सर ऐसे मरीज मिलते हैं जो लगातार रहने वाली खांसी का इलाज खुद ही कफ सिरप या एंटीबायोटिक्स से करते रहते हैं, लेकिन उन्हें कोई खास राहत नहीं मिलती. लंबे समय तक रहने वाली खांसी की वजह अस्थमा, एलर्जी, साइनस की समस्या, एसिड रिफ्लक्स, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, टीबी (TB) और कुछ मामलों में फेफड़ों का कैंसर हो सकता है.
महत्वपूर्ण संकेत को पहचानना बहुत जरूरी है
डॉ. सुशील कालरा का कहना है कि खांसी कितने समय तक रहती है और उसके साथ कौन से लक्षण दिखते हैं, ये महत्वपूर्ण संकेत हैं. अगर खांसी तीन हफ्ते से ज्यादा समय तक बनी रहती है, तो डॉक्टर से इसकी जांच जरूर करवानी चाहिए, खासकर तब, जब यह बार-बार हो रही हो या इसकी गंभीरता बढ़ रही हो. इसके साथ ही खांसने पर खून आना (हेमोप्टाइसिस), वजन कम होना, लगातार बुखार रहना, सांस लेने में तकलीफ (SOB), सीने में दर्द, रात में पसीना आना और थकान महसूस होना भी गंभीर चेतावनी वाले संकेत हैं. यह भी याद रखना जरूरी है कि हर तरह की खांसी के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती है.
हर खांसी के लिए एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं
डॉ. सुशील कालरा का कहना है कि सांस से जुड़े कई इन्फेक्शन वायरल होते हैं और उनमें एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं होती है. इसलिए, अगर आपको लगातार खांसी हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री देख सकते हैं, धूम्रपान की आदतों या हानिकारक चीजों के संपर्क में आने के बारे में पूछ सकते हैं, और अभी चल रही दवाओं और लक्षणों को नोट कर सकते हैं. इन जानकारी के आधार पर, डॉक्टर चेस्ट का एक्स-रे, ब्लड टेस्ट, पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट या दूसरी जांचें करवाने की सलाह दे सकते हैं.
तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी
डॉ. सुशील कालरा का कहना है कि अगर इलाज असरदार न हो, खांसी दोबारा हो जाए, या गंभीर लक्षण (चेतावनी के संकेत) दिखें, तो सिर्फ वही दवा लेते रहने के बजाय बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) पर दोबारा विचार करना चाहिए. हालांकि खांसी होना आम बात है, लेकिन लगातार खांसी किसी छिपी हुई बीमारी का संकेत हो सकती है. इसलिए, घबराने के बजाय तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. शुरुआती जांच से बीमारी की असली वजह का पता लगाने और मरीज को सही समय पर सही इलाज दिलाने में मदद मिल सकती है. अगर खांसी बनी रहती है, तो खांसी की सिरप की एक और बोतल खरीदने के बजाय उसकी असली वजह का पता लगाना जरूरी है.

