राजस्थान:- बीकानेर से कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली बेहद महंगी जीवनरक्षक दवाओं को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है. अस्पतालों में दिए जाने वाले महंगे एंटी-कैंसर ‘इवालोमैब’ इंजेक्शन [00:48] की जांच रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि जिन शीशियों (vials) को लाखों रुपये में मरीजों को बेचा जा रहा था, उनमें दवा की जगह सिर्फ पानी भरा था. इतना ही नहीं, लैब जांच में इनमें इंसानी शरीर के लिए घातक ‘ई. कोलाई’ जैसे बैक्टीरिया भी पाए गए हैं.
जर्मनी की लैब जांच से हुआ खौफनाक खुलासा
बीकानेर कैंसर अस्पताल से जुड़े इस संदिग्ध इंजेक्शन मामले की जब राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड और ड्रग विभाग द्वारा जांच कराई गई, तो इसके सैंपल जर्मनी की लैब में भेजे गए थे. रिपोर्ट में पाया गया कि ब्लैक मार्केट में बेचे जा रहे इन इंजेक्शनों में कैंसर रोधी दवा का मुख्य एक्टिव इंग्रेडिएंट पूरी तरह गायब था. मरीज और उनके परिजन जिन दवाओं को जिंदगी बचाने की उम्मीद में भारी-भरकम खर्च उठाकर खरीद रहे थे, वे असल में केवल पानी की शीशियां थीं.
कैसे काम कर रहा था यह काला कारोबार
जांच में सामने आया है कि सरकारी सप्लाई के तहत अस्पतालों में आने वाले इस महंगे इंजेक्शन की खाली शीशियों को चुरा लिया जाता था या गैर-कानूनी तरीके से बाहर निकाला जाता था. इसके बाद केमिकल्स की मदद से शीशियों पर लिखे बैच नंबर और अन्य डिटेल्स मिटा दी जाती थीं. फिर उनमें पानी भरकर और नकली पैकेजिंग कर उन्हें ब्लैक मार्केट में लगभग 1-1 लाख रुपये तक में बेचा जा रहा था. सरकारी अस्पतालों से सस्ती सप्लाई का झांसा देकर इसे दिल्ली तक के मरीजों को सप्लाई किया जा रहा था.
दिल्ली क्राइम ब्रांच का एक्शन
इस पूरे मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भी बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. करीब 9 करोड़ रुपये के इस फर्जीवाड़े में पुलिस ने अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों के पास से भारी मात्रा में एंटी-कैंसर दवाओं की खाली शीशियां, फर्जी बॉक्स और लाखों रुपये कैश बरामद हुए हैं.

