रायपुर :- शिक्षकों के प्रशासनिक तबादले किए जाने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।नवीन शिक्षक संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने प्रशासनिक तबादलों की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पिछले सत्र में शिक्षकों की आवश्यकता और उपलब्धता का आकलन कर युक्तियुक्तकरण किया गया था, तो बीच सत्र में पुनः इतने बड़े पैमाने पर शिक्षकों का स्थानांतरण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
तबादले से पहले रिक्त पदों की जानकारी क्यों नहीं
संघ के प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि किसी भी शिक्षक का प्रशासनिक स्थानांतरण करने से पहले संबंधित जिले और विद्यालयों में वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी जुटाना आवश्यक है।
यदि अधिकांश शिक्षकों को जिला शिक्षा अधिकारी के विकल्प पर तबादला दिया गया है, तो शिक्षकों को विकल्प देने से पहले स्कूलवार रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध क्यों नहीं कराई गई?उन्होंने सवाल किया—
“यदि रिक्त पदों की जानकारी थी तो शिक्षकों के सामने सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि रिक्त पदों की जानकारी नहीं थी, तो बिना रिक्त पदों का आकलन किए तबादले कैसे किए गए?”
युक्तियुक्तकरण से पीड़ित शिक्षकों को फिर झटका
नवीन शिक्षक संघ ने कहा कि पिछले शिक्षा सत्र में
युक्तियुक्तकरण के नाम पर बड़ी संख्या में शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों से हटाकर दूसरे विद्यालयों में पदस्थ किया गया था। कई शिक्षक आज भी
युक्तियुक्तकरण से उत्पन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं।ऐसे समय में बीच शिक्षा सत्र में फिर बड़े पैमाने पर प्रशासनिक तबादले किए जाने से शिक्षकों के साथ अन्याय की स्थिति बन रही है।संघ का कहना है कि बार-बार स्थानांतरण से केवल शिक्षक ही प्रभावित नहीं होते, बल्कि विद्यार्थियों की पढ़ाई और विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
खुली स्थानांतरण नीति लागू क्यों नहीं
प्रदेश अध्यक्ष विकास सिंह राजपूत ने कहा कि प्रदेश में शिक्षकों के लिए खुली एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू की जानी चाहिए।शिक्षकों को जिले एवं विद्यालयवार रिक्त पदों की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके बाद शिक्षकों से विकल्प लेकर पारदर्शी तरीके से स्थानांतरण किया जाए, ताकि किसी भी शिक्षक को यह महसूस न हो कि उसके साथ मनमानी या भेदभाव हुआ है।
संघ ने शासन के सामने रखे 6 बड़े सवाल इतिहास
पिछले सत्र में शिक्षकों की कमी बताकर युक्तियुक्तकरण किया गया तो अब बीच सत्र में करीब 700 तबादले क्यों?
तबादले से पहले स्कूलवार वास्तविक रिक्त पदों की जानकारी क्यों नहीं जुटाई गई?
शिक्षकों को विकल्प देने से पहले रिक्त पदों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
युक्तियुक्तकरण से प्रभावित शिक्षकों की समस्याओं का समाधान किए बिना पुनः तबादले क्यों?
बीच सत्र में इतने बड़े पैमाने पर तबादले से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी?
शिक्षकों के लिए खुली और पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने में आखिर परेशानी क्या है?
प्रदेश अध्यक्ष बोले—“शिक्षा व्यवस्था प्रयोग का विषय नहीं”
विकास सिंह राजपूत ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था कोई प्रयोगशाला नहीं है। हर प्रशासनिक निर्णय का सीधा असर विद्यालयों और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है।उन्होंने शासन से मांग की कि वर्तमान प्रशासनिक तबादलों की समीक्षा करते हुए स्कूलवार शिक्षक उपलब्धता एवं रिक्त पदों का वास्तविक आकलन किया जाए। युक्तियुक्तकरण से पीड़ित शिक्षकों की समस्याओं का निराकरण किया जाए तथा भविष्य के लिए स्पष्ट, खुली एवं पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू की जाए।शिक्षकों को इधर-उधर करने से पहले यह सुनिश्चित हो कि बच्चों की पढ़ाई कहीं इधर-उधर न हो जाए

