कोरबा:- लगातार हो रही बारिश से जहां नदी नाले उफान पर हैं, वहीं सांप भी बिलों में पानी के भर जाने से बाहर निकलने लगे हैं. सांपों के बाहर आने से सर्पदंश की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं. शुक्रवार देर रात को ग्राम मिसीया में जहरीले सांप के काटने से 21 साल की नवविवाहिता की मौत हो गई. ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में वानांचल क्षेत्रो में सांप काटने की घटनाएं बढ़ जाती है. इसके बावजूद इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं को आज तक मजबूत नहीं किया जा सका है. गांव वालों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हाल फिलहाल में सर्पदंश से चार मौतें हो चुकी हैं.
रात में सोते समय सांप ने डसा
ग्रामीणों के अनुसार, मृतिका प्रमिला (उम्र 21 वर्ष), जो मूल रूप से देवपहरी के पास स्थित ग्राम थारपखाना की रहने वाली थी, वर्तमान में कोरबा जिले की चौकी कोरबी अंतर्गत ग्राम मिसीया में अपने ससुराल में रह रही थी. मृतिका का विवाह महज 1 महीने पहले ही सोनू धनवार (उम्र 25 वर्ष, पिता – संतराम) के साथ हुआ था. बीती रात लगभग 1 बजे जब परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे, तभी एक जहरीले डंडा करैत सांप ने प्रमिला को डस लिया.
अस्पताल ले जाते समय में हुई मौत
सांप के काटने का पता चलने पर परिजनों ने तुरंत एम्बुलेंस की मदद ली. गंभीर हालत में मृतिका को पहले पोड़ी उपरोड़ा के स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया. जहां से गंभीर हालत को देखते हुए मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा के लिए रेफर किया गया. सुबह करीब 5:00 बजे कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में नवविवाहिता की मौत हो गई.
परिवार के पास नहीं था आधार कार्ड
इलाज के दौरान औपचारिकताएं पूर्ण करते वक्त, यह बात भी सामने आई है कि मृतिका और उसके पति के पास आधार कार्ड नहीं था. अचानक हुई इस दुर्घटना से नवविवाहिता के मायके और ससुराल दोनों पक्षों में शोक की लहर है. पीड़ित परिवार मूल रूप से मछली पकड़ने का काम करता है और अस्थाई तौर अलग-अलग जगहों पर निवास करता रहता है. इस वजह से दोनों का आधार कार्ड अबतक नहीं बन पाया.
सर्पदंश के आंकड़े बढ़े
कोरबा जिले के वनांचल और ग्रामीण इलाकों पोड़ी, कोरबी, पाली, लेमरू जैसे क्षेत्र में मानसून के मौसम में सर्पदंश की घटनाएं तेजी से बढ़ जाती हैं. करैत, डंडा करैत, कोबरा जैसे विषैले सांपों के काटने के मामले अक्सर रात के वक्त सोते समय सामने आते हैं. मेडिकल कॉलेज अस्पताल कोरबा में हर साल बरसात के महीनों में सर्पदंश के दर्जनों से लेकर सैकड़ों गंभीर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. जून से लेकर जुलाई तक की स्थिति में सर्पदंश से मौत का यह चौथा मामला है.

