नई दिल्ली:- प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे अपनी पहली बड़ी सफलता बताया है। हालांकि संगठन ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक बाकी प्रमुख मांगों पर सरकार निर्णय नहीं लेती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा छात्रों की आवाज की जीत है, लेकिन यह केवल पहला कदम है। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य सिर्फ इस्तीफा नहीं, बल्कि पेपर लीक से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जवाबदेही तय करना है।
CJP ने बताईं कौन-कौन सी मांगें अब भी लंबित
संगठन ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी शेष मांगों की सूची जारी की। CJP के अनुसार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा उनकी पहली मांग थी, जो पूरी हो गई है। अब संगठन पेपर लीक से जुड़े कथित आत्महत्या के मामलों में मृत छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ मुआवजा देने, प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लेने और आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर दिल्ली पुलिस तथा RAF से सार्वजनिक माफी की मांग कर रहा है।
लोकतांत्रिक आंदोलन की ताकत की जीत
अभिजीत दीपके ने कहा कि यह घटनाक्रम लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण आंदोलन की ताकत को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक एकजुट होकर अपनी मांगों पर डटे रहें तो सरकार को जवाबदेह बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान बल प्रयोग के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग की।
पेपर लीक विवाद के बीच बढ़ा राजनीतिक दबाव
पेपर लीक के मुद्दे को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है। विपक्षी दल भी सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे माहौल में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार CJP की बाकी मांगों पर क्या फैसला लेती है और छात्र आंदोलन आगे किस दिशा में बढ़ता है।

