कैंसर एक बेहद गंभीर बीमारी है. आज के समय में, लाखों लोग कैंसर से पीड़ित हैं. यह तब होता है जब शरीर की कुछ कोशिकाएं तेजी से और बेकाबू होकर बढ़ने लगती हैं. ये कोशिकाएं आस-पास के ऊतकों या अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं. कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है. जैसे कि मुंह, फेफड़े, आंतें, लिवर, स्तन या दिमाग, यहां तक कि हमारी हड्डियां भी इससे सुरक्षित नहीं हैं. लेकिन, हड्डी के कैंसर को आम तौर पर कैंसर के कम पाए जाने वाले प्रकारों में से एक माना जाता है. मतलब, कैंसर के अन्य प्रकारों की तुलना में इस कैंसर के कम मामले सामने आते हैं. लेकिन इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि हड्डी के कैंसर के अधिकांश मामले बच्चों और यंग एडल्ट में देखे जाते हैं.
हड्डी के कैंसर के कारण
देहरादून के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. हेम जोशी बताते हैं कि हड्डी का कैंसर एक गंभीर और कॉम्प्लेक्स बीमारी है, जो हड्डी के टिश्यू के भीतर कोशिकाओं की असामान्य और अनकंट्रोल बढ़त के कारण होती है. वह बताते हैं कि हालांकि यह बीमारी जीवन के किसी भी पड़ाव पर हो सकती है, लेकिन आमतौर पर यह बच्चों और युवा वयस्कों में अधिक देखने को मिलती है. इसके अलावा, महिलाओं की तुलना में पुरुषों में हड्डी के कैंसर का खतरा थोड़ा अधिक होता है.
डॉ. हेम जोशी बताते हैं कि यह ‘प्राइमरी’ हो सकता है (यानी जिसकी शुरुआत हड्डी में ही होती है) या फिर ‘मेटास्टेटिक’ हो सकता है (यानी शरीर के किसी अन्य हिस्से में मौजूद कैंसर के फैलकर हड्डियों तक पहुंचने से होता है)
डॉ. हेम जोशी बताते हैं कि कैंसर सेल्स के विकसित होने की जगह और कुछ अन्य फैक्टर्स के आधार पर, बोन कैंसर को आम तौर पर चार प्रकारों में क्लासिफाइड किया जाता है: ऑस्टियोसारकोमा, इविंग सारकोमा, कॉन्ड्रोसारकोमा और कॉर्डोमा. इनमें से, ऑस्टियोसारकोमा सबसे अधिक देखा जाने वाला प्रकार है, जिसके मामले विशेष रूप से युवाओं में ज्यादा पाए जाते हैं. इसके विपरीत, कॉन्ड्रोसारकोमा आमतौर पर बुजुर्गों में अधिक पाया जाता है. डॉ. हेम जोशी बताते हैं कि बोन कैंसर के लिए कई फैक्टर्स जिम्मेदार हो सकते हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं…
जेनेटिक फैक्टर्स: यदि परिवार के किसी सदस्य को हड्डी का कैंसर हुआ है, तो अन्य सदस्यों में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है.
आयोनाइजिंग रेडिएशन: हाई लेवल के रेडिएशन के संपर्क में आने से हड्डी के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. यह रेडिएशन मेडिकल इलाज या परमाणु दुर्घटनाओं के कारण हो सकता है.
अन्य कैंसर: कुछ मामलों में, शरीर के अन्य हिस्सों में शुरू होने वाला कैंसर हड्डियों तक फैल सकता है. इसे मेटास्टेटिक हड्डी का कैंसर कहा जाता है.
हड्डी के कैंसर के लक्षण
डॉ. हेम जोशी बताते हैं कि हड्डी के कैंसर के लक्षण, प्रभावित जगह और कैंसर के बढ़ने की स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं. यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इस कैंसर के कई प्रकारों में, बीमारी के शुरुआती चरणों में लक्षण अस्पष्ट या हल्के हो सकते हैं. हालांकि, जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, लक्षण ज्यादा साफ दिखाई देने लगते हैं, बशर्ते व्यक्ति अपने स्वास्थ्य और शरीर पर ध्यान देता रहे. हड्डी के कैंसर के कुछ आम लक्षण (जो बीमारी के लगभग सभी प्रकारों में दिखाई दे सकते हैं) नीचे दिए गए हैं.
हड्डियों में दर्द, बोन कैंसर का सबसे आम लक्षण है. यह दर्द रात में या फिजिकल एक्टिविटी के दौरान बढ़ सकता है.
प्रभावित हिस्से में सूजन हो सकती है, जो स्किन पर दिखाई दे सकती है या छूने पर महसूस हो सकती है.
हड्डियां कमजोर या भुरभुरी हो सकती हैं, जिससे उनके आसानी से टूटने का खतरा बढ़ जाता है.
बिना किसी खास वजह के बहुत ज्यादा थकान महसूस हो सकती है.
अचानक वजन कम होना भी बोन कैंसर का एक संकेत हो सकता है.
बार-बार बुखार आना और रात में बहुत ज्यादा पसीना आना भी इसके लक्षण हो सकते हैं.
हड्डी के कैंसर के चरण क्या हैं
कैंसर की स्टेजिंग से पता चलता है कि कैंसर कितना फैल चुका है और डॉक्टरों को सही इलाज का प्लान तय करने में स्टेजिंग मदद करता हैं. कैंसर की स्टेजिंग तय करने के लिए, डॉक्टर इस बात का अंदाजा लगाते हैं कि कैंसर के बढ़ने और फैलने की कितनी संभावना है. वे यह जांचते हैं कि क्या ट्यूमर सिर्फ हड्डी तक ही सीमित है या आस-पास के हिस्सों में भी फैल गया है. आखिर में, वे यह देखते हैं कि क्या ट्यूमर शरीर के दूसरे हिस्सों, जैसे कि दूसरे अंगों तक भी फैल गया है (मेटास्टेसाइज हो गया है). इन सभी जानकारियों का इस्तेमाल करके, डॉक्टर हड्डी के कैंसर को एक स्टेजिंग देते हैं, जो I से III तक होता है.

