दुर्ग:- महापौर नीरज पाल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 8 अरब 38 करोड़ 63 लाख 32 हजार रुपए का अनुमानित बजट पेश किया. लेकिन बजट चर्चा के दौरान ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि पूरा सदन हंगामे की भेंट चढ़ गया. स्थिति इतनी बिगड़ी कि आयुक्त को हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव तक लाया गया.
भिलाई नगर निगम बजट पेश करने के दौरान हंगामा
भिलाई निगम सभागार में बजट पर चर्चा के दौरान विपक्षी पार्षदों ने आयुक्त पर गंभीर आरोप लगाए. भाजपा पार्षद पीयूष मिश्रा ने निगम एक्ट की धारा 54 का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि विभिन्न मदों में बदलाव कर ठेकेदारों को भुगतान किया गया और नियमों की अनदेखी की गई. इसी बीच आयुक्त के एक बयान “बुद्धि वाली बात होगी तो ही मैं सदन में बैठूंगा ने विवाद को और भड़का दिया. इस टिप्पणी को सदन की गरिमा के खिलाफ बताते हुए पक्ष और विपक्ष दोनों ने कड़ा विरोध जताया.
आरोपों को आयुक्त ने नकारा
बैठक के बाद मीडिया से चर्चा में निगम आयुक्त राजीव पांडेय ने सभी आरोपों को निराधार बताया. उन्होंने कहा कि पार्षद द्वारा सुझाए गए कुछ कार्य नियमों के विरुद्ध थे, जिन्हें उन्होंने वापस कर दिया, इसी कारण उन पर आरोप लगाए जा रहे हैं. आयुक्त ने स्पष्ट किया कि सभी भुगतान निगम नियमों के तहत ही किए गए हैं. आयुक्त ने कहा कि विशेष सामान्य सभा में जो विषय रखे जाते हैं उसके अतिरिक्त किसी अन्य विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए. किसी को व्यक्तिगत परेशानी है तो वह उनकी निजी समस्या है.
बयान पर आयुक्त की सफाई
आयुक्त ने सफाई देते हुए कहा कि वे केवल बुद्धिपूर्ण चर्चा की बात कर रहे थे, लेकिन इस बयान के बाद माहौल पूरी तरह गरमा गया. महापौर सहित सभी पार्षद आयुक्त को हटाने की मांग करते हुए नारेबाजी करने लगे.

