देवास:- जिला मुख्यायल से करीब 150 KM की दूरी पर मोक्षदायिनी नर्मदा नदी के किनारे जिले के अंतिम छोर पर बसा है नेमावर. जहां हर भूतड़ी अमावस्या पर दूर दूर से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. श्रद्धालु अपने शरीर की बाहरी बाधाओं से निजात और दुःख दरिद्रता से निजात पाने के लिए नर्मदा घाट आते हैं. श्रद्धालुओं का मानना है यहां पूजन पाठ करने से शरीर की बाहरी बाधाएं दूर होती हैं. वहीं कई मानसिक बीमारी के लोगों को भी यहां देखा जा सकता है.
बाधाओं से पीड़ित लोग पहुंचते हैं नर्मदा घाट
श्रद्धालुओं का मानना है कि यह सिद्ध स्थान है. जिसके चलते बाहरी बाधाओं से पीड़ित लोग अपने परिजन के साथ यहां आते हैं और पूरी रात नर्मदा के तट पर तंत्र मंत्र चलता है. पड़ियार (पंडित) झूमते नाचते-गाते हुए अपने हाथों में तलवार, बक्का, भाला व अन्य धार धार हथियार लिए इन बुरी शक्तियों पर काबू पाने की जदोजहद करते रहते हैं. जिसे आस्था का पर्व माना जाता है, जो कि सारी रात चलता है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है.
दावा-पूजा पाठ के बाद शरीर को छोड़ देती हैं बुरी आत्माएं
पड़ियार बुरी शक्ति से पीड़ित को बैठाकर विधिविधान से पूजा पाठ कराते हैं. जिसके बाद पीड़ित को पूजा-पाठ करवाकर नर्मदा नदी में डुबकी लगवाई जाती है. ‘हर भूतड़ी अमावस्या पर नर्मदा नदी के घाट पर हजारों श्रद्धालु अपने शरीर से बाहरी बाधाओं से निजात पाने यहां आते हैं. पड़ियार-बाबाओं द्वारा तंत्र मंत्र की साधना का प्रयोग कर श्रद्धालुओं के शरीर से बाहरी बाधाओं को बाहर निकाला जाता है और वापस उस शरीर में प्रवेश ना करने का वचन दिलवाकर नर्मदा नदी में पवित्र होने की डुबकी लगवाई जाती है. अंत में सिधेश्वर बाबा के दर्शन कराए जाते हैं.

