ज्योतिष शास्त्र में धातुओं का विशेष महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है लोहे का छल्ला, जिसे शनि देव से जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि सही विधि और सही समय पर लोहे का छल्ला पहनने से शनि की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की कई परेशानियां दूर हो सकती हैं। हालांकि, बिना जानकारी और सलाह के इसे पहनना लाभ के बजाय नुकसान भी पहुंचा सकता है।
हर किसी के लिए शुभ नहीं लोहे का छल्ला
ज्योतिष के अनुसार, लोहे का छल्ला हर व्यक्ति के लिए अनुकूल नहीं होता। कुछ विशेष ग्रह स्थितियों में इसे धारण करना वर्जित माना गया है।
राहु-केतु का प्रभाव – जिन लोगों की कुंडली में राहु या केतु अशुभ स्थिति में हों, उन्हें लोहे का छल्ला पहनने से बचना चाहिए।
बुध और सूर्य की मजबूती – जिनकी कुंडली में बुध या सूर्य अत्यधिक मजबूत हों, उन्हें बिना ज्योतिषीय सलाह के लोहे का छल्ला नहीं पहनना चाहिए।
शनि की शुभ स्थिति – अगर शनि पहले से ही शुभ फल दे रहे हों, तो बिना परामर्श के लोहे का छल्ला पहनने से शनि का प्रभाव असंतुलित हो सकता है।
इन लोगों को मिल सकता है विशेष लाभ
शनि की साढ़ेसाती या ढैया: साढ़ेसाती या ढैया से गुजर रहे लोगों के लिए लोहे का छल्ला लाभकारी माना जाता है।
नकारात्मक ऊर्जा से परेशान लोग: जिन्हें बार-बार डरावने सपने आते हों या नजर दोष की समस्या रहती हो, उन्हें भी लोहे का छल्ला पहनने की सलाह दी जाती है।
लोहे का छल्ला पहनने की सही विधि
शुभ दिन – शनिवार को लोहे का छल्ला पहनना सबसे शुभ माना जाता है।
सही उंगली – पुरुष दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में और महिलाएं बाएं हाथ की मध्यमा उंगली में इसे धारण करें।
शुद्धिकरण – शनिवार की सुबह छल्ले को गंगाजल और कच्चे दूध से शुद्ध कर शनि देव के बीज मंत्र का जाप करते हुए पहनना शुभ माना जाता है।
बरतें ये सावधानियां
छल्ला घोड़े की नाल या पुरानी नाव की कील के लोहे से बना होना चाहिए।
छल्ला पूरी तरह गोल हो और उसमें किसी प्रकार का जोड़ या वेल्डिंग न हो।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, लोहे का छल्ला पहनने से पहले कुंडली की जांच और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है, ताकि इसका असर जीवन पर सकारात्मक बना रहे।

