नई दिल्ली :– टोल प्लाजा पर टैक्स बकाया रखने वाले वाहन मालिकों के लिए मोदी सरकार ने बड़े और सख्त नियम लागू कर दिए हैं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने नए केंद्रीय मोटर वाहन नियम 2026 को अधिसूचित कर दिया है, जिसके तहत अगर किसी वाहन पर टोल प्लाजा की पुरानी यूजर फीस बकाया है तो न तो वह गाड़ी बेची जा सकेगी और न ही उसका ट्रांसफर, फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट या री-रजिस्ट्रेशन कराया जा सकेगा,
सरकार का साफ मकसद नेशनल हाईवे पर बैरियर फ्री टोलिंग सिस्टम लागू करना और टोल टैक्स चोरी पर पूरी तरह लगाम लगाना है, नए नियमों के अनुसार टोल बकाया होने पर वाहन मालिक को एनओसी नहीं मिलेगी, दूसरे राज्य में रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाएगा, आरसी की वैधता खत्म होने के बाद दोबारा रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा,
नया या पुराना फिटनेस सर्टिफिकेट रिन्यू नहीं किया जाएगा और नेशनल परमिट भी जारी नहीं होगा, मंत्रालय ने अनपेड यूजर की नई परिभाषा भी जोड़ी है, जिसमें वे वाहन शामिल होंगे जिनकी इलेक्ट्रॉनिक एंट्री तो दर्ज हो गई लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 के तहत तय यूजर फीस जमा नहीं हुई,
सरकार ANPR यानी ऑटोमैटिक नंबर प्लेट पहचान सिस्टम और RFID आधारित FASTag के जरिए मल्टी लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम लागू कर रही है, जिसके तहत हाई रेजोल्यूशन कैमरों और फास्टैग रीडर से गाड़ियों की पहचान कर बिना रुके टोल वसूला जाएगा, नियमों का उल्लंघन करने पर वाहन मालिक को ऑनलाइन नोटिस भेजा जाएगा और भुगतान नहीं होने पर FASTag निलंबित किया जा सकता है,
साथ ही अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जाएगा, वाहन ट्रांसफर के लिए जरूरी फॉर्म 28 में भी बदलाव किया गया है, जिसमें अब वाहन मालिक को यह घोषणा करनी होगी कि किसी भी टोल प्लाजा पर उसकी कोई बकाया देनदारी लंबित है या नहीं, यह नियम 11 जुलाई 2025 को जारी ड्राफ्ट पर जनता और संबंधित पक्षों से मिले सुझावों के बाद लागू किए गए हैं,
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया है कि 2026 में नेशनल हाईवे पर पूरी तरह बेरोकटोक और बैरियर फ्री टोल सिस्टम लागू करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है, जिससे टोल वसूली की लागत 15 प्रतिशत से घटकर करीब 3 प्रतिशत रह जाएगी और हाईवे के रखरखाव व मरम्मत को और मजबूत किया जा सकेगा।

