रांची: झारखंड में मानव तस्करी का एक नया और चौंकाने वाला मामला सामने आया है. पहली बार राज्य से 27 बच्चों को मुफ्त पढ़ाई, खाना और उच्च शिक्षा देने के नाम पर नेपाल ले जाया गया. हैरानी की बात यह है कि इन 27 बच्चों में से कई बच्चों के परिवार अपने बच्चों को नेपाल से वापस लाना ही नहीं चाहते, जबकि कुछ परिवार अपने बच्चों की सुरक्षित वापसी की गुहार लगा रहे हैं.
पुलिस मुख्यालय गंभीर, मंगवाई रिपोर्ट
पश्चिम सिंहभूम जिले के विभिन्न गांवों से 27 बच्चों को नेपाल स्थित ‘नमो बुद्ध मेडिटेशन सेंटर’ ले जाने के मामले में जिला पुलिस ने पुलिस मुख्यालय को पूरी रिपोर्ट सौंप दी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि सेंटर से भागकर आए दो बच्चों के बयान दर्ज किए गए हैं. दोनों बच्चों ने बताया कि नारायण कांडयांन नाम के व्यक्ति ने ग्रामीण मुंडा राम जोंको के माध्यम से बच्चों के परिजनों को विश्वास में लिया था कि उनके बच्चों को नमो बुद्धा मेडिटेशन सेंटर, काठमांडू (नेपाल) में रहना, खाना और मुफ्त उच्च शिक्षा मिलेगी.
इन आश्वासनों में आकर परिजन बच्चों को भेजने के लिए तैयार हो गए और 27 बच्चे नेपाल के लिए रवाना हो गए.लेकिन वहां पहुंचने के बाद बच्चों को जो वादे किए गए थे, उनका पालन नहीं हुआ. हालात देखकर दो बच्चे दीवार फांदकर भाग निकले और अपने गांव लौट आए. इसके बाद पूरी बात ग्रामीणों और फिर प्रशासन तक पहुंची.
मानव तस्करी के आरोप में FIR दर्ज
झारखंड पुलिस के प्रवक्ता और आईजी अभियान डॉ. माइकल राज ने बताया कि पश्चिम सिंहभूम के रंगा माटी क्षेत्र से 27 बच्चों को नेपाल ले जाया गया था. इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई है.
चाईबासा पुलिस के अनुसार, नेपाल ले जाए गए 27 बच्चों में से अब तक 6 बच्चे अपने गांव सुरक्षित लौट आए हैं, जबकि 21 बच्चे अभी भी नेपाल में ही हैं. सभी बच्चों को सकुशल वापस लाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. हालांकि चौंकाने वाली बात यह है कि लगभग 15 बच्चों के परिजन अपने बच्चों को वापस नहीं लाना चाहते, जबकि 6 बच्चों के अभिभावक हर हाल में अपने बच्चों की वापसी चाहते हैं.

